SC ने 8 फरवरी तक टाली अयोध्या केस की सुनवाई, सिब्बल इस मांग पर अड़े - Khabar NonStop
नई दिल्ली। अयोध्या स्थित रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के स्वामित्व पर आज मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। बाबरी मस्जिद विध्वंस के 25वीं वर्षगांठ से ठीक एक दिन पहले यह सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। मामले की सुनवाई 2 महीने के लिए टाल दी गयी है। अब इस मामले की सुनवाई 8 फ़रवरी 2018 को होगी।
योगी आदित्यनाथ: अयोध्या विवाद पर अब बातचीत का कोई मतलब नहीं, बहुत देर हो चुकी है
कपिल सिब्बल ने सुनवाई 2019 तक टालने की मांग की
मामले में सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने मांग की है कि इसकी सुनवाई 2019 तक के लिए टाल दी जाये। उन्होनें कहा इस मामले की सुनवाई 2019 के आम चुनाव के बाद की जाये। कपिल सिब्बल ने इस विवाद को राजनैतिक विवाद बताते हुए सुनवाई के बहिष्कार की बात कही है। कपिल सिब्बल ने एनडीए के एजेंडा का हवाला देते हुए कहा कि राम मंदिर उनके घोषणा पात्र में शामिल है इसलिए इसकी सुनवाई 2019 के आम चुनाव के बाद होनी चाहिए।
अगली दीपावली से पहले बनेगा राम मंदिर: सुब्रमण्यम स्वामी
ये हैं इस मामले के वकील
रामलला की तरफ से- सीएस वैद्यनाथन
सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से – राजीव धवन, अनूप जॉर्ज चौधरी, कपिल सिब्बल
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से – तुषार मेहता, ASG
ये है सुनवाई करने वाली बेंच
इस मामले की सुनवाई करने वाली बेंच में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के अलावा जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस.अब्दुल नजीर शामिल हैं।
अयोध्या में राममंदिर बनने से खत्म होगा हिन्दू व मुस्लमान का मनमुटाव – आजम खान
पढ़ें कब क्या हुआ..
1528 इतिहासकारों के मुताबिक अयोध्या में बाबरी मस्जिद का निर्माण हुआ।
1949- मस्जिद में गुप्त रूप से भगवान राम की मूर्ति रखी गयी।
1984- मंदिर निर्माण की एक कमेटी का हुआ गठन।
1959- निर्मोही अखाड़ा ने इस विवादित स्थल को स्थानांतरित करने की अर्जी दी।
1961- में यूपी सुन्नी सेंट्रल बोर्ड ने कब्जे के लिए अपील की।
1986- विवादित स्थल को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।
1986- बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन।
1990- लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में रथयात्रा की शुरुआत।
1991- रथयात्रा का असर, उत्तर प्रदेश में बीजेपी सत्ता में। मंगाई गई देश भर से ईंट।
6 दिसंबर, 1992- कार सेवकों द्वारा बाबरी मस्जिद का विध्वंस। देश भर में सांप्रदायिक दंगा। पुलिसिया कारवाई में लोगों की मौत। अस्थाई राम मंदिर बना।
16 दिसंबर, 1992- विवादित ढांचा विध्वंस के लिए जांच कमेटी एमएस लिब्रहान आयोग बना।
1994- इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में मामले की सुवाई शुरू।
4 मई, 2001- स्पेशल जज एसके शुक्ला ने बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सहित 13 नेताओं को किया आरोप मुक्त।
1 जनवरी, 2002- तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी द्वारा अयोध्या विभाग शुरू किया गया।
1 अप्रैल 2002- इलाहबाद हाईकोर्ट में मालिकाना हक़ को लेकर कारवाई शुरू।
5 मार्च 2003- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को कोर्ट द्वारा खुदाई का निर्देश।
22 अगस्त, 2003- खुदाई की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गयी। मस्जिद के नीचे मंदिर के मिले प्रमाण।
सितंबर 2003- हिन्दू नेताओं के खिलाफ कारवाई शुरू।
जुलाई 2009- 17 साल बाद लिब्राहन आयोग ने सौंपी रिपोर्ट। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दी गयी रिपोर्ट।
26 जुलाई, 2010- हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने फैसला किया सुरक्षित। आपसी हल से मामले को सुलझाने की दी नसीहत।
28 सितंबर 2010- इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रोकने की कोशिश। सुप्रीम कोर्ट ने अपील की ख़ारिज।
30 सितंबर 2010- इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला। विवादित हिस्सा तीन भाग में बांटा गया। एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े को मिला।
9 मई 2011- सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर लगाई रोक।
21 मार्च 2017- सर्वोच्च न्यायालय ने आपसी सहमती बनाने का दिया निर्देश।
19 अप्रैल 2017- लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का दिया गया आदेश।
9 नवंबर 2017- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने की मुलाकात, दिया बड़ा बयान। राममंदिर बनाने की दी सलाह।
16 नवंबर 2017- आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने मध्यस्थता करने की कोशिश की, कई पक्षों से हुई मुलाकात।
05 दिसंबर 2017- सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई। कोर्ट ने सुनवाई की तारीख 8 फरवरी 2018 रखी।
योगी आदित्यनाथ: ननिहाल में राम मंदिर बन गया है, तो आगे भी रास्ता निकल आएगा
from Latest News in Hindi http://ift.tt/2nulLNA
Comments
Post a Comment