यह गांव कहा जाता है बाउंसरों की फैक्ट्री, हर शख्स है बाउंसर, देखे : Photos
इंटरनेट डेस्क। ये दुनिया बहुत ही अजीबोगरीब रहस्यों और लोगों से भरी हुई है। इस धरती पर कुछ लोगों की हरकते, कारनामें आदि हमारें लिए बहुत ही चौंकाने वाली होती है। …जी हाँ, दिल्ली के पास असोला फतेहपुर बेरी नाम के 2 गाँव हैं। जहां से हर साल एक नहीं दो नहीं बल्कि बहुत सारे बाउंसर निकलते हैं। इस गाँव को बाउंसर्स का गाँव कहते हैं। इस गाँव मे पहलवानी की शुरुआत विजय पहलवान से हुई जो अभी एक अंगरक्षकों की कंपनी चला रहे हैं। वो गांव में कई युवा लड़कों को पहलवानों बनने के लिए एक प्रेरणा बन गए।
हालांकि, दिल्ली एनसीआर में पिछले कई सालों से नाईट क्लब, पब और बार का चलन भी काफी बढ़ा है। इन क्लबों में बाउंसर्स की बहुत ज़रूरत पड़ती है। दिल्ली एनसीआर में कई इवेंट्स और शादियों में भी बाउंसर की ज़रूरत होती है। बड़े शहरों में बाउंसर्स की डिमांड धीरे धीरे बहुत बढ़ती जा रही है। शुरुवात में इस गाँव के पहलवान लड़के जब बाउंसर बने तो उन्हें बहुत अच्छे पैसे मिलने लगे जो इस गाँव के लड़को के लिए बहुत थे।
इस गाँव के लोगों की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। यहाँ के गरीब किसानों के बेटों ने किसान बनने से बेहतर बाउंसर बनना समझा। यही एक कारण है कि अब आने वाली पीढ़ी भी बाउंसर ही बनना चाहती है। इसलिए इस गाँव का हर लड़का बाउंसर है और जो नहीं है वो बाउंसर बनने की ट्रैंनिंग ले रहा है।
इस गाँव के अधिकतर लड़के कसरत करते हैं, और अपने शरीर को मजबूत बनाने के लिए जुटे रहते हैं। इस गाँव का कोई भी लड़का न शराब पीता है और न ही तम्बाकू का सेवन करता है। गाँव के लड़कों के सामने सिर्फ एक गोल है, बाउंसर बनना”। बाउंसर बनने के बाद ना सिर्फ इस गाँव के लड़को की ज़िंदगी बदली है बल्कि दिल्ली एनसीआर के नाईट क्लबों को भी मजबूत बाउंसर मिले हैं।
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