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“विभाजन और शिक्षा” विषय को लेकर आयोजित हुआ सेमिनार, गणमान्य लोगों ने किया संबोधित - Khabar NonStop

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पुंछ। एपीजे अब्दुल कलाम मानव कल्याण फाउंडेशन ने गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया। यह सेमिनार रियायत बहरा विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया गया। गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज पुंछ के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में सभी क्षेत्रों के सैकड़ों बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।

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आज की संगोष्ठी में “विभाजन और शिक्षा” विषय पर चर्चा की गई थी। इस कार्यक्रम में मुख्य सूचना आयुक्त भारत, मुख्य अतिथि थे, जबकि अध्यक्ष राज्य महिला आयोग और पूर्व उप-कुलपति बाबा गुलाम भगवान दास विश्वविद्यालय डॉ मसूद ए चौधरी विशिष्ट अतिथि थे। कार्यक्रम के मुख्यअतिथि के रूप में उपस्थित इस अवसर पर बोलते हुए डॉ मसूद ए चौधरी ने कहा कि विभाजन एक इतिहास है और हमें इसके आगे बढ़ना होगा।

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उन्होंने कहा कि, विभाजन के प्रभावों के बारे में कोई संदेह नहीं है, लेकिन हमें आगे देखना होगा और इसमें कोई और रास्ता नहीं है। पुंछ के लोगों को विशेष रूप से संबोधित करते हुए मसूद साहब ने कहा, मुझे यहाँ लोगों के बीच शिक्षा की कमी महसूस होती है, शिक्षा उन सभी मुद्दों का समाधान है, जिनका हम सामना कर रहे हैं। इस अवसर पर बोलते हुए, संपादक बीबीसी उर्दू सेवा और महिला आयोग के अध्यक्ष नयम अहमद मेहजूर ने कहा कि, हमें समय-समय पर प्रताड़ित किया गया है। हमने हमेशा वफादारी दिखायी है लेकिन बदले में हमें हमेशा वफादार नहीं माना जाता था। उन्होनें कहा कि, 1953 में शेख अब्दुल्ला के कैद होने के बाद हालात बदतर हो गए।

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उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र को कश्मीर के प्रति अधिक उदार होना चाहिए और केंद्र के संबंधों को इस क्षेत्र के लोगों के बेहतर सुधार के लिए अधिक सौहार्दपूर्ण होना चाहिए। इस अवसर पर बोलते हुए, मुख्य अतिथि वजाहत हबीबुल्ला, जो 1975 में उपायुक्त पुंछ थे, उन्होंने कहा कि वह उदासीन महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभाजन बहुत विनाशकारी था और पुंछ को बुरी तरह नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को कश्मीरियों के प्रति बहुत ही मज़बूत होनी चाहिए क्योंकि वे हमारे अपने ही लोग हैं और हम उन्हें पीड़ित नहीं कर सकते।

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प्रारंभ में, अध्यक्ष कलाम फाउंडेशन के खलील ए बांदे ने सभी मेहमानों का एक-एक करके अभिवादन किया और कहा कि, विभाजन पुंछ के प्रत्येक नागरिक के लिए बेहद विनाशकारी साबित हुआ है और इसका सभी धर्मों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा, नाइब मोहतामिम जामिया जिया उल उल्म पुंछ मौलाना सईद हबीब, च असद नूमानी और प्राचार्य जीडीसी पुंछ प्रोफेसर मुसराज शाह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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इस मौके पर उपस्थित प्रमुख व्यक्तियों में उपायुक्त पूनच, तारिक अहमद ज़गर, डीसी पुंछ डॉ बजरत हुसैन, मौलाना गुलाम कादिर मोहतामिम जामिया जिया उल उलूम पुंछ, अधिवक्ता संजय रैना, अधिवक्ता ज़मान, ताज मीर, अधिवक्ता लाल हुसैन मुश्ताक, डॉ सलीम डिस्पी (ओपी), मोहन शर्मा डिप्टी एसपी (डीएआर), सीनियर अकदमीशियन केके कपूर, नरिंदर सिंह तलवार, प्रोफेसर शमीम बांदे, प्रो कमलजीत सिंह, संयोजक एआईएम आसिफ मीर, प्राचार्य जिया उल ऊलुम हाई स्कूल वाहिद ए बांदे थे। कलाम फाउंडेशन के चेयरमैन खलील ए बांदे ने उपस्थित लोगों को धन्यवाद ज्ञापित किया। संगोष्ठी की मेजबानी विख्यात एंकर प्रदीप खन्ना ने की। फाउंडेशन के मीडिया एनालिस्ट शबीर भट सेमिनार में स्वास्थ्य विकार के चलते कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो पाए थे।

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