बीच चौराहे पर गोली मारकर की हत्या, आरोपी फरार - Khabar NonStop
सुल्तानपुर। सोमवार को शहर के तिकोनिया पार्क चौराहे पर दीपू तिवारी की हत्या को फैय्याज हत्याकांड से जोड़कर देखा जा रहा है। 1 अगस्त 2016 को कोतवाली नगर क्षेत्र के घरहांकला निवासी फैय्याज लखनऊ-वाराणसी हाइवे किनारे गोराबारिक (अमहट) में एक ढाबे पर दोस्तों के साथ खाना खा रहा था तभी कार सवार अज्ञात युवकों ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने फैय्याज के भाई इफ्तिखार की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। 10 दिन बाद पुलिस ने वारदात का खुलासा करते हुए पालिका पालिका कर्मी अजीत उर्फ दीपू तिवारी, विवेक नगर निवासी अनुराग श्रीवास्तव व वैभव सक्सेना को पुलिस ने फैय्याज की हत्या में गिरफ्तार किया था।
बदले की भावना में हुई घटना!
जिस जगह दीपू की हत्या की गई वहीं पर फैय्याज के भाई की दुकान है। पुलिस इसे बदले की भावना में की गई घटना मान रही है। इसके पूर्व 13 सितंबर को पालिका कर्मी इबरार अहमद की भी बदले की भावना से ईदगाह इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हाल ही में अखंडनगर थाना क्षेत्र के राहुलनगर बाजार में ठेकेदार सतीश उर्फ सिंटू तिवारी की हत्या भी बदला लेने के लिए की गई थी।
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डेढ़ माह पहले आया था जमानत पर
फैय्याज हत्याकांड में दीपू तिवारी मुख्य अभियुक्त था। इस मामले में उसकी करीब डेढ़ माह पहले जमानत हुई थी। सूत्रों के मुताबिक दीपू इस मामले में सुलह-समझौता करने की जुगत लगा रहा था। बताया जाता है कि उसने मृतक के परिवारीजनों को मुकदमे में पैरवी न करने के एवज में मोटी रकम अदा की थी।
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पालिकाकर्मी के कंधों पर थी परिवार की जिम्मेदारी
चार भाई बहनों में दीपू तिवारी सबसे बड़ा था। उसके पिता रामशिरोमणि की करीब दस साल पहले मौत हो गई थी। मृतक आश्रित कोटे से पिता की जगह उसे नगर पालिका के जलकल विभाग में नौकरी मिली थी। छोटे भाई अजय, बहन सन्नो, राधा, पत्नी सीमा व बेटी पलक व बेटे देव समेत पूरे परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी दीपू के कंधों पर थी। उसकी मौत के बाद परिवार के सदस्य गहरे सदमे में हैं।
पांच गोलियां उतारी दीपू के शरीर में
तफ्तीश के दौरान पुलिस को घटनास्थल से 32 बोर कारतूस का खोखा मिला है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हमलावरों ने वारदात को अंजाम देने के लिए 32 बोर पिस्टल का इस्तेमाल किया है। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो दो गोली मारने के बाद हमलावर कुछ दूर चले गए। बाद में दोबारा लौटे और फिर से तीन गोलियां दीपू के शरीर में दाग दीं। जब उन्हें पूरी तसल्ली हो गई कि अब दीपू की मौत निश्चित है तो वे आराम से स्कूटी लेकर भाग गए।
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