रोडवेज बसों के पार्ट्स नहीं मिल रहे तो सड़कों पर पड़ी रही खटारा बसे - Khabar NonStop
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में रोडवेज डिपो अपनी घटिया सुविधाओं को लेकर हमेशा सुर्खियों में बना रहा है। डिपो के अधिकारी भी सरकार की मंशा में खरा उतरना नहीं चाहते। एक तरफ आये दिन हो रही किराये में बढ़ोत्तरी के बाद भी परिवहन निगम की सेवाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही है। यह हाल तब है जब चंद दिनों पहले किराये में दस फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है। आपको बता दे कि रोडवेज बस आम तौर पर यात्रियों के लिए सुगम और प्रमुख साधन माना जाता है। यहाँ तक कि यात्री अपने निजी वाहन को छोड़कर रोडवेज बस का सहारा लेते है, ताकि उन्हें बेहतर सुविधा मिल सके।
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पीलीभीत डिपो के पास 93 बसे, हालत खस्ता
पीलीभीत डिपो में कुल 93 निगम की बसे है। जिनमे अधिकतर की हालत खस्ता हो चुकी है। वही अधिकारियों का कहना है कि बसों के पार्ट्स का स्टॉक ख़त्म हो जाने के कारण खटारा बसों को रोड पर दौड़ना पड़ रहा है।
क्या कहना है चालकों और कर्मचारियों का
वही रोडवेज डिपो के कर्मचारियों का कहना है कि लंबे रूट पर भेजी जाने वाली अधिकांश बसो में सफ़र करना खतरनाक सावित हो सकता है। दिल्ली जाने बाली अधिकांश बसे बुरी तरह जर्जर हैं। जिनमे शीशे, दरवाजे और सीटें हर समय खटर-पटर करती रहती है। बही चालकों की माने तो डिपो तकनीकी खराबी ठीक करने के बाद फोरमैन बस को ओके करते है, लेकिन रास्ते में ही बस दगा दे जाती है। कई बार तो सवारियों को दूसरी बस में ट्रांसफर करने की नौबत आ जाती है, ऐसे में कई बार यात्रियों से कहासुनी भी हो जाती है।
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क्या कहना है एआरएम का
डिपो के एआरएम का कहना है कि डिपो में लगभग 25 बसे ऐसी है जो कंडम हो चुकी हैं। जो सड़को पर चलने लायक नहीं है यह सभी बसे पिछले आठ साल में ग्यारह लाख किलोमीटर से भी ज्यादा चल चुकी है। ऐसे में इन बसों की नीलामी प्रक्रिया कर देनी चाहिए।
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