पाकिस्तान से सीखें विनय कटियार - Khabar NonStop
शंभूनाथ शुक्ल
एक तरफ तो भारत में भारतीय जनता पार्टी के नेता दिल्ली की जामा मस्जिद को
यमुना देवी का मन्दिर बता रहे हैं और ताज़ महल को शिवालय वहीँ पाकिस्तान
में वहां की सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह पांडव कालीन मंदिर
कटासराज को स्वच्छ कराए. चीफ जस्टिस मियाँ साकिब निसार ने स्पष्ट तौर पर
कहा है कि हिन्दुओं के हक को संरक्षित करने के लिए कोर्ट किसी भी हद तक
जा सकती है. पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उन भारतीय नेताओं के
लिए सबक है जो कभी राष्ट्रवाद के नाम पर तो कभी इतिहास के पुनर्लेखन को
लेकर मुस्लिम विरोधी बयान दिया करते हैं.
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दुओं की धार्मिक पहचान और उनके पूजा
स्थलों के संरक्षण के लिए उच्च स्तरीय समिति के गठन का आदेश भी दिया है.
कहा जाता है कि 12 वर्ष के अपने वनवास के दौरान पांडवों ने अपने चार साल
यहीं गुजारे थे. कटासराज मंदिर के नीचे कटास (कटाक्ष) सरोवर है और यहीं
पर यक्ष और युधिष्ठिर में संवाद हुआ था. इस सरोवर से 800 फिट नीचे
कोतेहरा के पहाड़ हैं जहाँ बहुत सारे तपस्वी रहते थे और इसकी कन्दराओं में
तपस्या किया करते थे.
यह तो इतिहास में दर्ज है ही कि महमूद गजनवी के साथ
आया विद्वान इतिहासकार अल बिरूनी ने यहीं कटासराज में रहकर संस्कृत सीखी
थी.उसने अपनी पुस्तक किताब-उल-हिन्द में इसका जिक्र किया है.
लेकिन इस तरह के वातावरण में जब कट्टर कहे जाने वाले पाकिस्तान में
उदारवाद की बयार चल रही हो, तब भारत में सत्तारूढ़ पार्टी के नेता
ऊल-जुलूल बातें कर रहे हैं. यह तो इतिहासप्रसिद्ध बात है कि दिल्ली में
लालकिला शाहजहाँ ने बसाया था और उसके सामने ही उसने परकोटे से घिरा
शाहजहानाबाद बसाया था.
जामा मस्जिद जब बनी तो मानकर चला गया था कि इसमें
एक लाख लोग नमाज़ पढ़ सकते हैं. अब विहिप नेता विनय कटियार कह रहे हैं कि
यह तो यमुना देवी का मंदिर है. अब उन्हें कौन समझाए कि न तो उन्हें अन्य
धर्मों का ज्ञान है न हिंदू धर्म का. यमुना का मंदिर सिर्फ यमुनोत्री में
है. और शायद विनय कटियार अपने जीवन में कभी यमुनोत्री नहीं गए होंगे.
क्योंकि वहां पहुँचने के लिए 18 किमी पैदल चलना ही पड़ेगा. इसी तरह का
नाटक इन लोगों ने ताजमहल के बारे किया कि वह तो तेजोमय देवालय है. जिन
कथित इतिहासकार पीएन ओक के हवाले से यह बात कही गयी, उन्हें यह नहीं पता
कि किसी भी शिवालय की बनावट मीनारों वाली नहीं हो सकती.
बेहतर रहे कि ये नेतागण पडोसी देश पाकिस्तान से सबक लें.
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