दिल्ली हाईकोर्ट ने स्थानीय निकायों समेत केंद्र और दिल्ली सरकार से माँगा जवाब - Khabar NonStop
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि स्थानीय निकाय नालियों की सफाई और पेड़ों के कटाव को रोकने जैसी अपने वैधानिक कर्तव्य का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे न्यायपालिका को इसके लिए मजबूर होकर हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने कहा कि उत्तर दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में एक झोपड़ी के निवासियों ने कचरे के निर्वहन और निकासी के लिए समुचित सुविधाओं की कमी के कारण पीआईएल की सुनवाई करनी पड़ी।
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अदालत ने दिल्ली सरकार समेत इनको नोटिस जारी कर माँगा जवाब
अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, उसके वन और पर्यावरण विभाग, पुलिस, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), उत्तर दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) को नोटिस जारी किया और 7 मार्च तक उनका जवाब माँगा है। झोपड़ी के पास के क्षेत्र में रहने वाले वकील द्वारा जनहित याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि झुग्गी झोपड़ी (जेजे) कॉलोनी के निवासी अवैध रूप से पेड़ काट रहे हैं। निवासियों ने सिविल लाइन्स क्षेत्र में खैबर पास में पास के जंगली क्षेत्र में खुलेआम शौच करते हैं।
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झुग्गी क्लस्टर को स्थानांतरित करने की उठी मांग
याचिकाकर्ता संजुक्ता कबासी ने दावा किया कि झुग्गी निवासियों की गतिविधियां सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं और इसके अलावा क्षेत्र के वनस्पतियों और जीवों को भी नुकसान पहुंचाती हैं। याचिका में उठाए गए समस्याओं के बारे में उन्हें बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद उन्होंने स्थानीय अधिकारियों- डीपीसीसी, एनडीएमसी, पुलिस और दिल्ली सरकार पर भारी दंड लगाने की मांग की थी। उन्होंने कॉलोनी के निवासियों के खिलाफ कार्रवाई के अलावा झुग्गी क्लस्टर को स्थानांतरित करने और पुनर्स्थापित करने के लिए डीयूएसआईबी को अनुरोध किया है। अधिकारियों की प्रतिक्रिया मांगते समय, अदालत ने दिल्ली सरकार के वन विभाग को यह सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देश दिया कि क्षेत्र में पेड़ों की अवैध या अनधिकृत कटाई न हो।
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