जन्मदिन स्पेशल: जानें मशहूर उद्यमी सबीर भाटिया के सफलता के बारें में - Khabar NonStop
शिक्षा
सबीर की प्रारंभीक शिक्षा बेंगलोर के सेंट जोसफ बॉयज़ हाई स्कूल से हुई और इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए उन्होंने सन 1986 में पिलानी के बिड़ला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान में दाखिला लिया पर दो वर्ष के बाद ही एक कार्यक्रम के तहत अमेरिका के प्रसिद्ध कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में तबादला ले लिया। कैलटेक से स्नातक होने के बाद सन 1989 में उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनीयरिंग में एमएस करने के लिए स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। यहाँ उन्होंने ‘अल्ट्रा लो पावर वीएलएसआई डिजाइन’ पर कार्य किया।
जीवन की शुरुआत
सबीर भाटिया का जन्म 30 दिसम्बर 1968 को पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ में एक पंजाबी परिवार में हुआ था। उनके पिता बलदेव भाटिया भारतीय सेना में एक अधिकारी थे जो बाद में रक्षा मंत्रालय में शामिल हो गए और उनकी माता दमन भाटिया सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में वरिष्ठ अधिकारी थीं।
करियर की शुरुआत
-सन् 1995 में सबीर ने जावासॉफ्ट नाम की एक इन्टरनेट कंपनी प्रारंभ की। यह कंपनी लोगों की व्यक्तिगत इनफॉर्मेशन इंटरनेट पर स्टोर करती थी।
-इन सूचनाओं को इन्टरनेट के माध्यम से किसी भी कंप्यूटर पर देखा जा सकता था।
-इसी दौरान सबीर जिस कंपनी में कार्य कर रहे थे उसने कंपनी के इंटर्नल नेटवर्क में फायर वॉल लगा दिया। कारण ऑफिस कार्य करते हुए लोग अपना पर्सनल मेल चैक नहीं कर सकते थे।
-इसी क्षण सबीर के मन में एक विचार आया कि क्यों न ई-मेल को भी इन्टरनेट पर डाल दिया जाए।
-किसी भी स्थान से और किसी भी कंप्यूटर पर आप अपनी मेल देख सकें। वे अपने एक सहयोगी जैक स्मिथ के साथ मिलकर इस पर काम करने लगे।
-दोनों ने पहले वेब आधारित ई-मेल सिस्टम की क्षमता का परिक्षण किया और सिद्ध किया और उसके बाद हॉटमेल बनाने का फैसला किया।
-ज्यादा से ज्यादा लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए, यह ई-मेल सेवा बिलकुल मुफ़्त रखी गयी।
-वेबसाइट पर विज्ञापन के माध्यम से राजस्व प्राप्त किया जाने लगा। इस प्रकार हॉट मेल का जन्म हुआ और बाकी इतिहास है।
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-इससे पहले दुनिया में इस तरह की कोई भी ई-मेल प्रणाली नहीं थी। 16 फरवरी 1996 को हॉट मेल का जन्म हुआ।
-30 दिसंबर 1997 को सबीर भाटिया ने अपनी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट को बेच दी।
-सेवा प्रारंभ करने के छह महीनों के अन्दर ही, हॉटमेल ने दस लाख से अधिक लोगों को आकर्षित किया और जैसे ही यूजर्स की संख्या मे वृद्धि होने लगी।
– मशहूर आई.टी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट का ध्यान इस पर गया और 30 दिसम्बर 1997 को हॉटमेल को 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर में माइक्रोसॉफ्ट को बेच दिया गया।
-माइक्रोसॉफ्ट द्वारा हॉटमेल के अधिग्रहण के बाद सबीर ने लगभग एक साल तक माइक्रोसॉफ्ट में कार्य किया।
-अप्रैल 1999 में उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट छोड़कर एक इ-कॉमर्स कंपनी आरजू.कॉम प्रारंभ की पर यह कंपनी चल नहीं पायी और इसे बंद करना पड़ा।
-सन 2010 में इसे एक ट्रैवेल पोर्टल के रूप में दोबारा शुरू किया गया।
-इसके पश्चात उभरते हुए ब्लॉगॉसफियर को भुनाने के उद्देश्य से उन्होंने गएवरीवेयर की शुरूआत की पर यह भी कुछ ख़ास नहीं चल पायी।
-सन 2006 में उन्होंने एक नेटवर्क सुरक्षा विक्रेता और एसएसएल वीपीएन-प्लस के निर्माता, निओऐक्सेल में निवेश कर एंजल निवेशक बन गए।
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-सन 2008 में सबीर भाटिया ने सबसेबोलो.कॉम बाज़ार में उतारा जो एक मुफ्त वेब-आधारित टेलीकन्फरेनसिंग प्रणाली उपलब्ध कराती थी।
-जून 2009 में सबीर भाटिया की कंपनी सबसेबोलो ने जैक्सटर का अधिग्रहण कर लिया।
-उनके जैक्सटर को भी आशातीत सफलता नहीं मिल पायी और सबसेबोलो भी नहीं चल पाया।
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