मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ‘विश्व के सबसे बड़े’ सौर ऊर्जा संयंत्र की नींव रखी - Khabar NonStop
रीवा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को जिले के गुरह तहसील में “विश्व के सबसे बड़े अल्ट्रा मेगा सौर ऊर्जा संयंत्र” की आधारशिला रखी। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) को इस स्टेशन पर तैयार की जाने वाली हरित ऊर्जा को राष्ट्रीय राजधानी में अपनी ट्रेन चलाने के लिए प्रदान किया जाएगा।
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मुख्यमंत्री ने आज रीवा में विश्व के सबसे बड़े सोलर प्लांट 750 मेगावाट रीवा अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट परियोजना का शिलान्यास किया और उपस्थित जनसमुदाय के साथ अपने विचार साझा करते हुए कहा कि कोयले से बिजली उत्पादन में प्रदूषण होता है, जबकि सौरऊर्जा से प्रदूषण नहीं होता। #RewaSolar http://pic.twitter.com/eqghICG43K
— CMO Madhya Pradesh (@CMMadhyaPradesh) December 22, 2017
चौहान ने इस अवसर पर एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “यह खुशी की बात है कि विश्व के सबसे बड़े सौर संयंत्र की आधारशिला गुरह में राखी जा रही है। यह किसी भी प्रदूषण के बिना अधिक से अधिक हरित ऊर्जा का उत्पादन करेगी। इससे पहले, बिजली थर्मल और जल स्रोतों से उत्पन्न होती थी और यह (थर्मल) पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचाता है।”
एक अधिकारी के अनुसार, सौर संयंत्र 750 मेगावाट बिजली पैदा करेगा और 4,500 करोड़ रुपये के निवेश के साथ स्थापित किया जा रहा है। यह लगभग 1,600 हेक्टेयर भूमि के क्षेत्र में विकसित किया जायेगा। अधिकारी ने कहा, “इस संयंत्र में तैयार होने वाली हरित ऊर्जा की आपूर्ति दिल्ली मेट्रो में की जाएगी। इस उद्देश्य के लिए राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक परिवहन के लिए 24 प्रतिशत ऊर्जा की आपूर्ति करने के लिए एक समझौता किया गया है।” अपने संबोधन के दौरान सीएम चौहान ने यह भी कहा, “सूर्य ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है, इसलिए कोयला और जल के बजाय इसे एक प्रमुख तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। लोगों को इसके माध्यम से सस्ती बिजली मिलेगी और इससे किसी भी प्रकार की क्षति भी नही होगी।”
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उन्होंने कहा कि उनकी सरकार गरीबों को भोजन, कपड़े, घर और चिकित्सा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हमने यह सुनिश्चित करने के लिए योजनाएं बनाई हैं कि गरीबों को ये सुविधाएं मिलें और लोगों को जमीन पट्टे देने के लिए कानून तैयार किए जाए, ताकि गरीब एक स्थायी घर बना सकें।” चौहान ने कहा कि पहले, विंध्य क्षेत्र में कोयला और पानी का उपयोग करते हुए बिजली उत्पन्न होती थी, लेकिन अब यह सौर ऊर्जा और अपशिष्ट पदार्थों के जरिये तैयार की जाएगी।
एक अधिकारी के मुताबिक, संयंत्र के तहत 250 मेगावॉट की तीन इकाइयां स्थापित की जाएंगी। प्रति यूनिट बिजली की लागत तीन रुपए से कम होगी। भारत के सौर ऊर्जा निगम और मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम (एमपीयूवीएन) ने परियोजना के लिए हाथ मिला लिया है। इस अवसर पर, विद्युत, नई और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आर के सिंह ने ‘सौभाग्य योजना’ का उद्घाटन किया। इस योजना का उद्घाटन देश के सभी घरों को बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया।
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