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ऐसे पढ़ेगा इंडिया, तो वाकई बढ़ेगा इंडिया - Khabar NonStop

Bulandshahr

 

यूपी में प्रतिदिन गिरती शिक्षा व्यवस्था और प्राथमिक विद्यालयों बदहाल तस्वीरें तो आये दिन सामने आती हैं लेकिन बुलन्दशहर की सिकन्द्राबाद एसडीएम की लगन और मेहनत ऐसी रंग लाई है कि रिपोर्ट देखकर आप खुद कहेंगे, कि ऐसे पढ़ेगा इंडिया, तो वाकई बढ़ेगा इंडिया।

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रिपोर्ट देखिए-

एसडीएम की पाठशाला, बुलन्दशहर के सिकन्द्राबाद के हसनपुर जागीर में स्थित ये प्राथमिक विद्यालय जिसे देखकर आज हर कोई वाह-वाह कर रहा है। विद्यायल की क्लासों में टाइल्स लगी हुई हैं, जबकि यहां बने शौचालय भी किसी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के शौचालयों से कम नहीं हैं। अगर इससे पहले की बात करें तो विद्यालय की छत जर्जर थी, और इमारत की हालत बदहाल, लेकिन सिकन्द्राबाद एसडीएम शुभी काकन की दस्तक ने स्कूल की जो तस्वीर बदली वो आपके सामने है। दरअसल, सरकार के लाख दावों के बाद भी यूपी के प्राथमिक विद्यालयों की हालत और प्रतिदिन शिक्षा का गिरता स्तर किसी से छुपा नहीं हैं और शायद यही बात एसडीएम सिकन्द्राबाद को गवारा नहीं था। तभी तो एसडीएम ने सिकन्द्राबाद के ग्रामीण क्षेत्रों में स्तिथ उन विद्यालयों को गोद ले लिया, जिनमें मासूमों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा था। एसडीएम के इस कदम की जहां बुलन्दशहर में सराहना की जा रही है तो वहीं एसडीएम के इस सपने को साकार करने के लिए कई सामाजिक संगठनों ने हाथ भी आगे बढ़ाए। नतीजा आज सामने है प्राथमिक विद्यायल का री-इनॉग्रेशन है, मौके पर एसडीएम, तहसीलदार, और कई सामाजिक संगठनों आज विद्यालय पहुंचकर हवन पूजा की, और बच्चों के उज्वल भविष्य की कामना की।

एसडीएम ने स्कूल की हालत बदलने का लिया जिम्मा

एसडीएम ने विद्यालय की जर्जर हालत देखी तो, पहले उन्हें गुस्सा आया और फिर स्कूल की हालत बदलने का जिम्मा उठा लिया। इसके लिए उन्होंने सामाजिक संगठनों को आगे आने की अपील की सामाजिक संगठनों के हाथ भी आगे आये। एसडीएम ने सामाजिक संगठन की मदद जहां इमारत का पुनः निर्माण शुरू कराया तो वहीं हर सप्ताह, विद्यालय पहुंचकर बच्चों को खुद क्लास भी देने लगीं।

बच्चों से मिले प्यार से एसडीएम भावुक हुईं जबकि एसडीएम ये ठान चुकी हैं कि सिकन्द्राबाद की एसडीएम होने के नाते वो सिकन्द्राबाद के बाकि जर्जर विद्यालयों की भी हालत बदलकर छोड़ेंगी।

भारत के भविष्य कहे जाने वाले मासूमों को शिक्षित करने के एसडीएम सिकन्द्राबाद द्वारा उठाया गया ये क़दम वाकई सराहनीय है अगर यूपी के सभी अधिकारी ऐसी सोच बना लें तो कहा जा सकता है कि ऐसे पढ़ेगा इंडिया तो वाकई बढ़ेगा इंडिया।

FACEBOOK: बच्चों के लिए खास मैसेंजर एप, पैरंटल कंट्रोल का विकल्प भी



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