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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा ये - Khabar NonStop

Supreme Court

दिल्ली। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के पर्यावरण और वन मंत्रालय (एमओईएफ) से दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) द्वारा तैयार किये गए 39 पेज वाले एक्शन प्लान, विस्तृत कार्य योजना (सीएपी) को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा है।

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जीआरपी (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के बाद, जब वायु प्रदूषण सबसे ख़राब स्तर पर है, एनसीआर में हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए सीएपी प्रस्तुत की गयी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से भी पूछा कि क्या दिल्ली-एनसीआर में गंभीर वायु प्रदूषण के कारण होने वाली स्वास्थ्य संबंधी खतरों के कारण आर्थिक नुकसान के पहलू पर विचार किया गया है।

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शीर्ष अदालत ने एमओईएफ द्वारा दायर किए गए एक हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि उसने फसल के अवशेषों को जलाने को बंद करने के लिए एक उच्च स्तरीय कार्य बल का गठन किया है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, “वायु प्रदूषण के कारण बहुत से स्वास्थ्य खतरा पैदा होते हैं। बड़ी संख्या में लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है, विशेष रूप से बच्चों को इससे हानि पहुँचती है। बेंच ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एएनएस नाडकर्णी से कि स्वास्थ्य संबंधी वैद्यकीय पेशेवरों से संबंधित किसी भी व्यक्ति को स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के प्रभाव के बारे में टास्क फोर्स की चर्चा में शामिल क्यों नहीं किया गया?

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नाडकर्णी ने कहा कि वह इसके बारे में टास्क फोर्स के अध्यक्ष को सूचित करेंगे। शुरूआत में, बेंच ने नाडकर्णी से कहा कि टास्क फोर्स ने बैठकें तो आयोजित की हैं लेकिन इन विचार-विमर्श के परिणाम क्या हैं? नाडकर्णी ने कहा कि वह 15 जनवरी की सुनवाई के बाद न्यायालय में विचार-विमर्श के परिणाम पेश करेंगे।

पिछले महीने, सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें दिल्ली-एनसीआर में गंभीर वायु प्रदूषण का मुद्दा उठाया गया था जिसमें हरियाणा और पंजाब जैसे पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने का मुद्दा भी शामिल था। इस याचिका में दावा किया गया था कि एनसीआर और उसके आस-पास के इलाकों में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से स्वास्थ्य संबंधी विकार उत्पन्न होने लगे हैं।

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