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बाघ ने बनाया महिला सहित दो नीलगायों को निवाला - Khabar NonStop

pilibhitपीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में बाघ के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे है। अलग-अलग स्थानों पर बाघ ने किया हमला एक महिला और दो नीलगाय को मारकर अपना निवाला बना लिया। आपको बता दे कि साल बीतने को है और इस साल के अंत होने में अभी 3 दिन बाकी है। फिलहाल बाघ के हमलो में अब तक का यह 25वां हमला है। और वन विभाग के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे है।

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मौतों का सिलसिला जारी

घटना की सूचना मिलने के बाद भी वन विभाग के अधिकारी घटना स्थल पर जाने से कतराते है। और मौतों का सिलसिला लगातार जारी है। आदमखोर बाघ ने आज थाना न्यूरिया क्षेत्र के गाँव मुड़िया रतनपुरी क्षेत्र में दो नीलगायों को अपना निवाला बनाया और उसके बाद सुचना मिली कि कोतवाली दियोरिया क्षेत्र के पिपरईया गाँव में खेत पर जा रही एक 40 वर्षीय महिला पर हमला कर उसको मौत के घाट उतार दिया।

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वन विभाग को दी गई सूचना

घटना की सूचना वन विभाग को दी गयी पर वन विभाग के अधिकारी घटना स्थल पर नहीं पहुँचे। ग्रामीणों में लगातार हो रहे बाघ के हमलो को लेकर से काफी रोष है। वही ग्रामीणों में काफी दहशत का माहौल भी बना हुआ है। वही मुडिया रतनपुरी मे बाघ ने दो नीलगाय को निवाला बनाने के बाद गांब मे दहशत है। आलम यह है कि मुडिया गांव के ग्रामीणो का घर से निकलना दुश्वार हो रहा है।

जानवर भी भूख से तड़प रहे हैं

यहाँ गेहू की फसल और गन्ने की छिलाई होना आवश्यक है लेकिन आलम यह है बाघ की दहशत से यहाँ के ग्रामीण गेहूँ की फसल में न तो पानी लगा पा रहे और न ही गन्ने की छिलाई भी नही हो पा रही है। साथ ही जानवर भी भूख से तडप रहे है। लेकिन वन बिभाग अभी भी गहरी नींद में सोया हुआ है। ग्रामीण आये दिन दहशत का शिकार है पता नही कब किसको बाघ अपना निवाला बना ले।

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लोगों ने देखा नीलगाय को खाते हुए

वही खेत पर सिचाई करने के लिये गये युबक ने जब बाघ को नीलगाय को खाते हुए देखा तो युबक के पैरो तले जमीन खिसक गयी। शोर-शराबा होने पर ग्रामीण इकटठा हो गये। जिसके बाद बाघ गन्ने के खेत मे चला गया। हालाँकि इसी बीच ग्रामीणो ने वन बिभाग को सुचना दी तो साहब यहाँ घण्टो बाद आये तो जरूर पर साहब गन्ना खाने मे मस्त रहे। क्योकि इनको गांब बालो की क्या परबाह। इन्हे तो सिर्फ खाना पूरी ही करना है।

रेंजर सत्येन्द्र सिंह चौधरी से पूछा 

वही जब पीलीभीत रेंजर सत्येन्द्र सिंह चौधरी से पूछा कि आखिर कब तक ग्रामीणो को बाघ की दहशत के बीच रहना पडेगा तो साहब ने जबाब दिया कि वन बिभाग को बाघ को पकडने की परमिशन नही होती है। जब सरकार द्वारा वन बिभाग को बाघ पकडने की परमिशन मिलती है। इसके बाद साहब ग्रामीणो को बाते बताने लगे। कि ग्रामीण खेतो पर अकेले ना आये। ग्रामीण इकट्ठा होकर के खेतो पर काम करे। लेकिन बाते करना बहुत आसान है किस प्रकार ग्रामीण जानबरो को चारे की व्यबस्था करते है। कैसे ग्रामीण खेतो मे पानी लगाये कैसे ग्रामीण गन्ने की छिलाई करे। इस कदर ग्रामीणो मे बाघ की दहशत है कि पता नही कब किसको बाघ अपना शिकार बना ले।

 



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