जन्मदिन स्पेशल: सोनिया गांधी से जुड़ी खास बातें… - Khabar NonStop
आज कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का 70 वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। उनके जन्मदिन पर पूरे देश में कांग्रेस कार्यकर्ता कई कार्यक्रमों का आयोजन भी कर रहे हैं। तो चलिए हम भी सोनिया के जन्मदिन पर जान लेते हैं उनसे जुड़ी कुछ ख़ास बातें-
सोनिया का जन्म वैनेतो, इटली के विसेन्जा से कुछ दूर स्थित एक छोटे से गांव लूसियाना में हुआ था और उनके पिता स्टेफिनो मायनो एक भूतपूर्व फासिस्ट सिपाही थे। उनकी माता पाओलो मायनों हैं और उनकी दो बहनें हैं। उनका बचपन टूरिन, इटली से कुछ दूर स्थित ओर्बसानो में गुजरा था।
1964 में वो कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में बेल शैक्षणिक निधि के भाषा विद्यालय में अंग्रेजी भाषा का अध्ययन करने गईं, जहां उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई जो उस समय ट्रिनिटी विद्यालय कैम्ब्रिज में पढ़ते थे। 1968 में दोनों का विवाह हुआ, जिसके बाद वे भारत में रहने लगीं। राजीव गांधी के साथ विवाह होने के काफी समय बाद उन्होंने 1983 में भारतीय नागरिकता स्वीकार की। उनकी दो संतान हैं – एक पुत्र राहुल गांधी और एक पुत्री प्रियंका वाड्रा।
राजीव गांधी की हत्या होने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया से पूछे बिना उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनाये जाने की घोषणा कर दी गयी थी, लेकिन सोनिया ने इसे स्वीकार नहीं किया था। उस दौरान राजनीति और राजनीतिज्ञों के प्रति अपनी घृणा और अविश्वास को लेकर उन्होंने कहा था कि, ‘मैं अपने बच्चों को भीख मांगते देख लूंगी, परंतु मैं राजनीति में कदम नहीं रखूंगी।’
कांग्रेस के नेताओं के दबाव में सोनिया गांधी ने 1997 में कोलकाता के प्लेनरी सेशन में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की और उसके 62 दिनों के अंदर 1998 में वो कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गयीं।
सोनिया गांधी अक्टूबर 1999 में बेल्लारी, कर्नाटक से और साथ ही अपने दिवंगत पति के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी, उत्तर प्रदेश से लोकसभा के लिए चुनाव लड़ीं और और करीब तीन लाख वोटों की विशाल बढ़त से विजयी हुईं। वो रायबरेली से सांसद हैं।
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1999 में 13वीं लोक सभा में वे विपक्ष की नेता चुनी गईं और 1998 से अभी तक वो कांग्रेस अध्यक्ष हैं। वो जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी से भी ज्यादा वक्त कांग्रेस की अध्यक्ष रही हैं। वो कांग्रेस के इतिहास में सबसे लंबे समय तक रहने वाली अध्यक्ष हैं। सोनिया गांधी को कई बार दुनिया की पावरफुल महिलाओं की सूची में भी शामिल किया गया है।
राजनीति की राह आसान कहां होती है उनके राजनीति में कदम रखने के बाद विदेशी मूल का मुद्दा उठाया गया और उनकी कमज़ोर हिन्दी को भी मुद्दा बनाया गया। इसके साथ ही उन पर परिवारवाद का भी आरोप लगा लेकिन कांग्रेसियों ने उनका साथ नहीं छोड़ा और इन मुद्दों को नकारते रहे।
2004 के चुनाव से पहले कांग्रेस की हालत बहुत खराब थी और माना जा रहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री होंगे। हालांकि सोनिया के नेतृत्व में लड़े गए इस चुनाव में यूपीए को अनपेक्षित 200 से ज्यादा सीटें मिली और यूपीए की सरकार बन गयी। उस वक्त सोनिया गांधी 16 पार्टियों के गंठबंधन की नेता चुनी गईं थीं।
उस वक्त सोनिया गांधी ने स्वेच्छा से प्रधानमंत्री नहीं बनने की घोषणा की और सभी नेताओं ने मनमोहन सिंह का समर्थन किया और उन्हें गठबंधन का अध्यक्ष चुना गया। साल 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने फिर यूपीए के लिए देश की जनता से वोट मांगा और एक बार फिर यूपीए ने जीत हासिल की।
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