राहुल गाँधी की अय्यर को सीख! - Khabar NonStop
शंभूनाथ शुक्ल
राहुल गाँधी ने आखिर मणिशंकर अय्यर को सबक सिखा ही दिया। अय्यर की बदजबानी से कांग्रेस को नुकसान ही हो रहा था। वे जो मन में आए बोलने के लिए मशहूर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस में कोई उनके विरुद्ध इसलिए नहीं बोलता था क्योंकि वे राजीव गाँधी के बाल सखा रहे हैं। वे और राजीव गाँधी दून स्कूल में साथ-साथ पढ़ चुके हैं। किसी को भी यह समझ नहीं आ रहा था कि मणिशंकर अय्यर कांग्रेस के लिए पालक हैं या संहारक। अंततः कल की घटना के बाद राहुल गाँधी ने मणिशंकर अय्यर को कांग्रेस से निलम्बित कर दिया। हर नाज़ुक घड़ी में उनकी जुबान ऐसी फिसलती है कि ऊपर चढ़ी कांग्रेस भरभरा कर फिर नीचे आ जाती रही है। सोमवार को उन्होंने औरंगजेब का उदाहरण दिया तो गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘नीच आदमी’ बोल दिया, वह भी उस मौके पर जब गुजरात में पहले चरण के मतदान को कुछ ही घंटे शेष थे। इसका फलित तो 18 दिसम्बर को पता चलेगा लेकिन कांग्रेस को समरभूमि में ही रक्षात्मक हो जाना पड़ा।
गुजरात में जो भी हारा उसको हरिनाम!
वह तो शुक्र है राहुल गाँधी का जो जिन्होंने फौरन मणिशंकर अय्यर से माफ़ी मांगने का आग्रह किया। क्योंकि नरेंद्र मोदी भाजपा के नेता ही नहीं हैं वे देश के प्रधानमंत्री हैं। लेकिन वे यह कहकर टालमटोल करते रहे कि चूँकि उन्हें हिंदी नहीं आती इसलिए उन्हें स्वयं नहीं पता कि जो उन्होंने कहा है, उसका सही मतलब क्या है। मगर मणिशंकर की पढाई-लिखाई दिल्ली में हुई है इसलिए उनका यह बहाना किसी के भी गले के नीचे नहीं उतर रहा था।
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मध्य काल के मशहूर हिंदी कवि अब्दुर्रहीम खानखाना का एक दोहा है- “रहिमन जिव्हा बावरी, कर गई सरग-पताल, आपुहिं तो भीतर गई जूती खात कपाल!” यानी जीभ ऐसी पगलाई हुई है कि कुछ भी बोल जाती है। इसके बाद वह तो मुंह के अंदर चली जाती है, मार झेलनी सिर को पड़ती है। यही हाल इन राजनीतिक दलों के नेताओं का है. बिना कुछ सोचे-समझे कुछ भी बोल देंगे और उसके बाद उनकी जो छीछालेदर होती है, उसका नुकसान उस राजनीतिक दल को होता है, जिसके वे सदस्य हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर तो अक्सर ऐसे बोल-कुबोल बोल जाते जाते हैं, जिसके कारण उनकी पार्टी को शर्मिंदा होना पड़ता है।
अभी चार दिसम्बर को जब कांग्रेस अध्यक्ष की चुनावी प्रक्रिया के तहत राहुल गाँधी नामजदगी का परचा भर रहे थे, तभी कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षता को वंशवाद बताते हुए भाजपा ने घेरेबंदी की। इसके फौरन बाद मणिशंकर अय्यर ने पलटवार करते हुए कहा कि “जब शाहजहां जहांगीर की जगह आए थे, तब क्या इलेक्शन हुआ था? जब औरंगजेब ने शाहजहां की जगह ली तब क्या इलेक्शन हुआ था? नहीं न। यह सब जानते थे कि राजा की जगह उनका वारिस लेता है। यदि वे सभी एक-दूसरे के खिलाफ लड़ें तब अलग बात है।” आगे उन्होंने कहा “अब वक्त बदल गया है। प्रजातंत्र में, इलेक्शन होता है और सभी उसमें लड़ सकते हैं। हमने देखा था कि सोनियाजी के खिलाफ जितेंद्र प्रसाद खड़े हुए थे। आज जो भी चाहे चुनाव लड़ सकता है।”
“कांग्रेस का घोर हिंदू विरोध ही उसे ले डूबा!”
भाजपा ने अय्यर के ही बयान पर कांग्रेस पार्टी को घेर लिया. उसी रोज वलसाड के धर्मपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली थी, उन्होंने मणिशंकर अय्यर के बयान पर कहा कि ‘कांग्रेस के वरिष्ठ नेता खुद मानते हैं कि यह पार्टी नहीं बल्कि कुनबा है। कांग्रेस का औरंगजेब राज उन्हीं को मुबारक’। गुजरात चुनाव में कांग्रेस पर हल्ला बोलने को भाजपा के पास अच्छा मुद्दा आ गया। राजनीति में हर कदम सावधानी से उठाया जाना चाहिए, वह भी चुनाव के वक़्त और भी ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। लेकिन राजनेताओं की जुबान फिसल ही जाती है। मणिशंकर अय्यर के साथ यह थोड़ी और भी ज्यादा मुश्किल है। उन्होंने 2014 के ठीक पहले अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की एक बैठक में तब भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार नरेंद्र मोदी के लिए कह दिया था कि प्रधानमंत्री तो कभी वे बन नहीं सकते अलबत्ता वे चाहें तो यहाँ दिल्ली में 24, अकबर रोड स्थित कांग्रेस दफ्तर में आकर चाय बेंचे। इसका बहुत ख़राब सन्देश गया था। और तब भाजपा और उसके संभावित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर जम कर हमला बोला था। तब भाजपा ने कहा था कि कांग्रेस राज में भला एक गरीब चायवाला प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देख भी कैसे सकता है। मणिशंकर अय्यर की बदजबानी तब कांग्रेस को बहुत महंगी पड़ी थी।
इसके बाद भी मणिशंकर अय्यर ऐसे ही बोल-कुबोल बोलते रहे, जिस वज़ह से कांग्रेस को बार-बार लज्जित होना पड़ा है। हालाँकि ऐसा भी नहीं है कि जुबान सिर्फ कांग्रेसी नेताओं की ही फिसलती है, भाजपा में भी ऐसा गड़बड़झाला होता रहता है। अक्टूबर 2012 में नितिन गडकरी ने कहा था कि स्वामी विवेकानंद और दाउद इब्राहीम का आईक्यू सामान था। लेकिन जहाँ स्वामी विवेकानंद ने इसका इस्तेमाल राष्ट्रनिर्माण के लिए किया वहीँ दाउद ने इसका इस्तेमाल विध्वंसक कार्यों में किया। गिरिराज सिंह अपने बयानों से सदैव चर्चा में बने ही रहते हैं। कभी इसको पाकिस्तान चले जाने की बात करेंगे तो कभी उसको। इसके अलावा उसके सांसद साक्षी महाराज और मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति अपने बयानों को लेकर खासी चर्चा में रही हैं। मगर कांग्रेस में मणिशंकर अय्यर जैसे नेता जो विदेश सेवा में अफसर रहे हैं, दूं स्कूल में जिनकी स्कूलिंग हुई तथा उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय और कैम्ब्रिज में हुई, उसकी जुबान का फिसलना ज्यादा नुकसान पहुंचा देता है।
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और यह भी नहीं कि ऐसा पहली बार हो रहा है बल्कि हर नाजुक मौके पर उनकी जुबान से कुछ न कुछ ऐसा निकल जाता है, जिसको भाजपा भुना लेती है। मसलन उन्होंने 2015 में पाकिस्तान के एक टीवी चैनल को इंटरव्यू देते हुए कहा कि आप लोग नरेंद्र मोदी को उखाड़ने में हमारी मदद करिए। उनके ऐसे बयानों से कांग्रेस पार्टी की जगहंसाई तो होती ही है, खुद उनकी भी विश्वसनीयता खतरे में पड़ जाती है। मगर वे हैं कि मानते ही नहीं। अभी अक्टूबर में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी और उपाध्यक्ष राहुल गाँधी पर भी बयानबाजी कर दी थी। कांग्रेस में अकेले मणिशंकर अय्यर ही नहीं, दिग्विजय सिंह भी अक्सर ऐसे तीखे बोल-बचन बोलते ही रहते हैं। यहाँ तक कि चतुर वकील कपिल सिब्बल भी अक्सर जोश में होश खो बैठते हैं।
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