विश्व एड्स दिवस: ऐसे पता चला था ‘एड्स’ के बारे में - Khabar NonStop
एड्स एक बेहद खतरनाक बीमारी है। मुख्यतः यह असुरक्षित यौन संबंध बनाने की वजह से होता है। असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाते समय एड्स के जीवाणु शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। दरअसल शुरुआत में इस बीमारी का पता नहीं चल पाता, मरीज अन्य बीमारी के भ्रम में इसे समझ नहीं पाते हैं। ज्यादातर मरीज भी एचआईवी टेस्ट के प्रति सजग नहीं रहते इसलिए इसकी चपेट में आकर फंस जाते हैं।
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ऐसे पता चला इस बीमारी का
एड्स का पूरा नाम है ‘एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम।’ इसके बारे में पहली बार न्यूयॉर्क में 1981 में जानकारी हुई थी। कुछ ”समलिंगी यौन क्रिया” के शौकीन अपना इलाज कराने डॉक्टर के पास गए थे उनकी बीमारी के बाद एड्स का खुलासा हुआ। तमाम देशों में इस विषय पर शोध भी किया गया उसके बाद इसे ”एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम” यानी एड्स नाम दिया गया।
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1 दिसंबर को मनाया जाता है विश्व एड्स दिवस
विश्व एड्स दिवस, 1988 के बाद से 1 दिसंबर को हर साल मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य एचआईवी संक्रमण के प्रसार की वजह सेएड्स महामारी के प्रति जागरूकता बढाना, और इस बीमारी से जिसकी मौत हो गई है उनका शोक मनना है। सरकार और स्वास्थ्य अधिकारी, ग़ैर सरकारी संगठन और दुनिया भर में लोग अक्सर एड्स की रोकथाम और नियंत्रण पर शिक्षा के साथ, इस दिन का निरीक्षण करते हैं।
रोजाना हवन करिए और बीमारियों को दूर भगाइए!
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