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जामा मस्जिद के शाही इमाम ने प्रधानमंत्री मोदी से मांगी मदद - Khabar NonStop

Jama Masjid

दिल्ली। पुरानी दिल्ली में स्थित भव्य 361 वर्षीय मस्जिद के संरक्षकों के अनुसार, प्रतिष्ठित जामा मस्जिद को मरम्मत की जरूरी आवश्यकता है। इसके गुंबद और दीवारों के चटकने की जानकारी मस्जिद के संरक्षकों ने दी है। शाहजहांबाद शहर ऐतिहासिक की विरासत के केंद्रस्थल, जामा मस्जिद में बड़े पैमाने पर पानी टपकने की वजह से मुख्य गुंबद, वाह्य दीवारें और जटिल नक्कासी क्षतिग्रस्त हो रही हैं।

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प्रधानमंत्री से मांगी थी मदद

मस्जिद के शाही इमाम, सैयद अहमद बुखारी का कहना है कि उन्होंने पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था। पत्र में उन्होनें मस्जिद की तत्काल मरम्मत के लिए प्रधानमंत्री से मदद मांगी थी और उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से भी अपील की थी कि मस्जिद की स्थित ख़राब हो रही है। बुखारी ने कहा “मैंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री कार्यालय और एएसआई दोनों को बताया कि रखरखाव की कमी के कारण स्थायी क्षति हो गई है। विशेष रूप से, मुख्य प्रार्थना कक्ष और तीन गुंबदों के तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है।”

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वक्फ़ बोर्ड ने खड़े किये हाथ

एएसआई के प्रवक्ता डीएम दीमरी ने कहा कि एएसआई गुंबदों और दीवारों के गंभीर नुकसान से अवगत नहीं था। उन्होनें बताया कि, “फर्श की बहाली के लिए एक अनुमान तैयार किया गया है निविदा प्रक्रिया चल रही है, एएसआई जल्द ही जामा मस्जिद में काम शुरू कर देगा। जैसा कि मस्जिद एएसआई संरक्षित स्मारक नहीं है, इसकी नियमित निगरानी और रखरखाव की ज़िम्मेदारी हमारे पास नहीं है। मस्जिद के प्रबंधन और संरक्षण की जिम्मेदारी दिल्ली वक्फ बोर्ड के पास है।” वहीं बोर्ड के एक अधिकारी का कहना है कि, “हमारे पास मस्जिद की मरम्मत के लिए पर्याप्त धन नहीं है और हमेशा हम इसके लिए बाहरी सहायता पर निर्भर होते हैं।”

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मस्जिद-ए जहान नूमा के निमार्ण में आई थी इतनी लागत

17 वीं शताब्दी की मस्जिद, मूल रूप से नामित मस्जिद-ए जहान नूमा, भारत में सबसे बड़ी मस्जिद है। इसे मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा बनवाया गया था। शाहजहांबाद का निर्माण पूरा होने के बाद इसका निर्माण 1648 में शुरू हुआ था। उस समय इसे बनाने में छह साल का समय लगा और इसके निर्माण की कुल लागत 10 लाख रुपये थी।

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