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आखिर नदियों में क्यों फेंके जाते है सिक्के ? जानिए….

इंटरनेट डेस्क। जैसा की यह तो सभी जानते है पानी में सिक्का फेंकने की परंपरा बहुत पहले से ही चली आ रही है। उन दिनों तांबे के सिक्के हुआ करते थे। तांबा को शुद्घ धातु माना जाता है इसलिए इनका इस्तेमाल पूजा-पाठ में किया जाता है। तांबा सूर्य का धातु माना जाता है और यह हमारे शरीर के लिए भी आवश्यक तत्व है।

”I LOVE YOU” कहने से भी ज्यादा अच्छी है ये बाते, कभी कही है पार्टनर से…

तांबे का सिक्का पानी में फेंककर हम सूर्य देव और अपने पितरों को यह बताते हैं कि हे देव और हे पितर हमने जल के माध्यम से अपने शरीर की रक्षा योग्य तांबा ग्रहण कर लिया है। हमें यह आपके माध्यम से प्राप्त हुआ है इसलिए आभार स्वरुप आप भी जल के माध्यम से तांबा ग्रहण करें।

… अगर गर्लफ्रेंड से करते है प्यार तो कभी ना करें ये वाली बात !

लाल किताब में भी सूर्य और पितरों को प्रसन्न करने के लिए तांबे को बहते जल में प्रवाहित करने का विधान बताया गया है। हालांकि अब तांबे के सिक्के नहीं होते हैं। स्टेनलेस स्टील के सिक्कों को उसी परंपरा के तौर पर अब लोग में पानी में फेंकते हैं। जबकि वैज्ञानिक दृष्टि यह कहती है कि,जल में तांबे के सिक्के डालने से जल शुद्ध होता है और उस जल को पीने से अनेक बीमारियों का नाश स्वतः ही हो जाता है |

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