कविता : गर्व से कहो गाय हमारी माता है !
गाय हमारी माता है और हम है इसके बच्चे,
देखो तो सही, माँ कितनी सच्ची है और बच्चे कितने गंदे,
और बच्चे कितने गंदे |
क्या हम काबिल हैं कहलाने के इसके प्यारे बच्चे,
माँ हमारी कितनी काबिल पर बच्चे इसके कितने कच्चे,
पर बच्चे इसके कितने कच्चे |
वो हमें सींचती है अपना अमृत सा दूध देकर,
फिर भी हमारा पेट नहीं भरता इसका सबकुछ लेकर,
इसका सबकुछ लेकर |
क्या हम बच्चे इतने नादान, की कर नहीं सकते सबकुछ आसान,
वो तो है तत्पर हमारे लिए, पर क्या हम हो पाए है उसके,
आज, अभी और इसी समय, पूछो अपने दिल से,
गर कहते हो माँ उसे, तो मानते क्यों नहीं माँ उसे |
गर्व से कहो गाय हमारी माता है,
और हम उसके अटूट सहारा हैं,
हम उसके अटूट सहारा हैं ||
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