स्टार्टअप इंडिया इनिशिएटिव खतरे में
स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल शुरू किए गए महत्वाकांक्षी ‘स्टार्टअप इंडिया इनिशिएटिवÓ केंद्र की कई दूसरी योजनाओं की तरह विफल साबित हो रहा है। ये इनिशिएटिव ४ साल तक हर साल स्टार्टअप्स को 2500 करोड़ रु. की पूंजी मुहैया कराने के लिए शुरू हुआ था, जबकि दो साल बीत जाने के बाद भी इसके जरिए 75 स्टार्टअप्स को कुल 337 करोड़ की पूंजी ही मिली है।
फंड ऑफ फंड्स का चुना था रास्ता
स्टार्टअप इंडिया इनिशिएटिव के तहत सरकार ने सीधे स्टार्टअप्स को पूंजी देने की बजाए फंड ऑफ फंड्स का रास्ता चुना था। इसमें सरकार को सिडबी के जरिए बाजार नियामक सेबी के तहत रजिस्टर्ड वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) को पैसे देने थे और एआईएफ को योग्य स्टार्टअप्स को चुन कर उसमें पैसे लगाने थे।
600 करोड़ रुपए ही सरकार ने जारी किए दो साल में
5350 स्टार्टअप्स को मान्यता
राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, सिडबी ने 2015-16 में 500 करोड़ और 2016-17 में 100 करोड़ रु. 17 एआईएफ को जारी किए। इसमें से भी एआईएफ ने 337 करोड़ का इस्तेमाल ही 75 स्टार्टअप्स को पैसे देने में किया। अब तक 5350 स्टार्टअप्स को देश में मान्यता दी जा चुकी है, जिसमें 40 हजार से अधिक कर्मी हैं।
स्टार्टअप इंडिया के ये भी फायदे
रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स को पेटेंट
फाइल करने में सहायता मिलती है।
सरकारी खरीद में स्टार्टअप्स
को फास्ट ट्रैक क्वालिफिकेशन मिलता है।
अर्हता रखने वाले स्टार्टअप को इसमें टैक्स छूट का भी प्रावधान है।
एआईएफ से पूंजी के अलावा सिडबी से क्रेडिट सहायता भी
मिलती है।
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