आखिर क्यों..? साँप के काटने पर नहीं करनी चाहीए ये गलतियां !
इंटरनेट डेस्क। भारत में जहरीले सांपों की 13 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से चार बेहद जहरीले सांप कोबरा, रस्सेल वाइपर, स्केल्ड वाइपर और करैत हैं। सबसे ज्यादा मौतें नाग या गेहूंवन और करैत के काटने से होती हैं। तीन तरह का होता है सांप का जहर। इनमें हीमोटॉक्सिक, न्यूरोटॉक्सिक और मायोटॉक्सिक शामिल है।
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सांप के काटने पर रखे ये सावधानियां….
पहली गलती :- सांप के काटने के बाद प्रभावित हिस्से में चीरे का निशान न लगाएं। चीरे के निशान से सांप का ज़हर दोगुनी रफ़्तार से खून के जरिए शरीर में फैलने लगता है। दिमाग पर असर छोड़ता है। कुछ ही देर में मौत हो सकती है।
दूसरी गलती :- शरीर के जिस हिस्से पर सांप ने काटा है, उसे ज्यादा न हिलाएं। मरीज़ को चलने न दें। मांसपेशियों में रगड़ से ज़हर फैलने की रफ़्तार दोगुनी हो जाती है।
तीसरी गलती :- सांप ने शरीर के जिस हिस्से पर काटा है, उसके आसपास या उसपर पट्टियां कतई न बांधे। ऐसा करने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और खून सप्लाई करने वाली नसों के फटने का डर ज्यादा बना रहता है।
चौथी गलती :- सांप के काटने के बाद कभी भी मरीज़ को टेढ़े न लिटाएं। इससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है. मरीज़ को सीधे लिटाकर इलाज़ के लिए अस्पताल ले जाएं। जैसे स्ट्रेचर पर मरीज़ को लिटाया जाता है।
पांचवी गलती :- एस्प्रिन या कोई दर्द निवारक दवा बिलकुल न दें। इससे मरीज़ की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। मरीज़ का दर्द बढ़ सकता है।
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