रोजगार को मौलिक अधिकार में शामिल करने की मांग
नई दिल्ली। राज्यसभा में आज रोजगार को मौलिक अधिकारों में शामिल करने और बेरोजगारों को अनिवार्य रुप से भत्ता देने की मांग की गयी। समाजवादी पार्टी के विशंभर प्रसाद निषाद ने सदन में इस आशय के एक निजी विधेयक‘ संविधान (संशोधन) विधेयक 2016 (नया अनुच्छेद 16 ए शामिल करना) पर चर्चा शुरू करते हुए कहा कि देश में बेरोजगारों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे समाज में गरीबी बढ़ी है और सामाजिक संघर्ष में इजाफा हुआ है।
उन्होंने कहा कि बेरोजगार युवा अक्सर भटक जाते हैं और आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो जाते हैं। इसकी कारण आतंकवाद और कट्टरवाद की समस्या पैदा होती है। विध्वंसक गतिविधियों में पाए जाने वाले युवा अक्सर बेरोजगार होते हैं। निषाद ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराए। कृषि की नयी तकनीक सामने आने के कारण पंरपरागत रोजगार के अवसर समाप्त हो गए हैं। देश में तकरीबन 15 करोड़ लोग बेरोजगार है जिनकी आयु 30 वर्ष से कम है। सरकार को युवाओं को अनिवार्य रूप से रोजगार उपलब्ध कराना चाहिए अन्यथा उनको बेरोजगारी भत्ता देना चाहिए। इससे ये लोग भी सम्मान के साथ जीवनयापन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि बेरोजगार युवा अक्सर हताश हो जाते हैं और आत्महत्या जैसा घातक कदम भी उठा लेते हैं। दूसरी ओर युवाओं का शोषण होता है और उनसे 12 से 16 घंटे तक काम लिया जाता है। (भाषा)
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