2008 मालेगांव विस्फोट: एनआईए कोर्ट ने प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को दी राहत - Khabar NonStop
मुंबई में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की एक विशेष अदालत ने बुधवार को मालेगांव मामले में महाराष्ट्र के संगठित अपराध अधिनियम के तहत साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित, रमेश उपाध्याय और अजय राहकर को छुट्टी दे दी। उन्हें शस्त्र अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 17, 20 और 13 के तहत रिहा किया गया था। इसके बदले, उन्हें गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम की धारा 18 (साजिश) और भारतीय दंड संहिता के कई खंडों के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।
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15 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने कहा कि सभी अभियुक्तों की जमानत जारी रहेगी। पीठ ने पहले कहा था कि वह आरोपी द्वारा दायर की गई छुट्टी याचिका पर फैसला करेगी। मामले की अगली सुवाई के लिए अदालत ने 15 जनवरी की तारिख मुकर्रर की है। 26 सितंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय को जमानत दे दी थी। 19 सितंबर को मुंबई में एनआईए की अदालत ने दो अन्य – सुधाकर चतुर्वेदी और सुधाकर द्विवेदी को भी जमानत दी थी। लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को सशर्त जमानत दी गई थी और 23 अगस्त को जेल से रिहा करवाने के बाद उन्होंने सशर्त जमानत के लिए आवेदन किया था।
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योगी आदित्यनाथ को फंसाने की हुई थी कोशिश
मई 2016 में दायर अपने पूरक आरोपपत्र में, जांच एजेंसी ने प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ आरोप ख़त्म करने की सिफारिश की थी। एजेंसी ने उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं होने का दावा किया था। बाद में चतुर्वेदी ने दावा किया कि महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते से पूछताछकर्ता ने मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अदित्यनाथ और अन्य हिंदू नेताओं को फंसाने की कोशिश की थी।
29 सितंबर को हुए विस्फोट में छः लोगों की हुई थी मौत
29 सितंबर, 2008 को, महाराष्ट्र के मालेगांव में दो विस्फोटों में कम से कम छह लोग मारे गए और कई लोग घायल हो गए थे। कट्टरपंथी हिंदू संगठन अभिनव भारत पर मामले का संदेह जाहिर किया गया था। आतंकवाद विरोधी दस्ते ने 14 मामले में राईट-विंग चरमपंथियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
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