केन्द्र और दिल्ली सरकार 100 साल पुराने कब्रिस्तान को लेकर आमने-सामने - Khabar NonStop
नई दिल्ली। लगभग सौ साल पुराना दिल्ली में एक कब्रिस्तान केन्द्र और दिल्ली सरकार के बीच मालिकाना हक के विवाद में उलझ गया है। इस कब्रिस्तान जो कि दिल्ली में माता सुंदरी रोड पर स्थित है, पर केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरु की गई है। वहीं, केन्द्र सरकार को केजरीवाल सरकार ने कानून व्यवस्था और मालिकाना हक संबंधी तथ्यों से अवगत कराया। और इस कब्रिस्तान पर जो कि लगभग सौ साल पुराना है, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं करने का परामर्श दिया है।
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राजस्व सचिव मनीषा सक्सेना ने कहा
दिल्ली सरकार की राजस्व सचिव मनीषा सक्सेना ने मंत्रालय के मातहत भूमि एवं विकास विभाग के निदेशक को कहा है कि कब्रिस्तान के ऐतिहासिक महत्व और अन्य तथ्यों के मद्देनजर रखते हुए कोई कार्रवाई नहीं करना चाहिए। वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष भी सक्सेना हैं।
आप विधायक ने उठाया मामला
इस मामले को आप विधायक अमानतुल्ला खान ने बोर्ड के समक्ष उठाया। और बताया कि मालिकाना हक को लेकर केन्द्र और राज्य सरकार के बीच कब्रिस्तान की जमीन पर विवाद है। उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान की आठ बीघा जमीन पर दिल्ली वक्फ बोर्ड द्वारा राजस्व विभाग के दस्तावेजी रिकॉर्ड के हवाले से बोर्ड का मालिकाना हक बताया गया है। खान ने ये भी कहा कि इसके बावजूद कब्रिस्तान के एक हिस्से में रह रहे वक्फ बोर्ड के कुछ कर्मचारियों के आवास हटाने की कार्रवाई भूमि एवं विकास विभाग ने शुरू की है।
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वक्फ कानून के मुताबिक
विभाग द्वारा इस बारे में बोर्ड को जारी नोटिस के जवाब में सक्सेना ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक यह कब्रिस्तान 1975 में अधिसूचित किया गया है। जो कि आठ बीघा क्षेत्रफल वाला है। अधिसूचना में इसे सौ साल पुराना कब्रिस्तान बताया गया है। और कहा गया है कि अब तक किसी भी सक्षम न्यायाधिकरण में इस अधिसूचना को चुनौती नहीं दी गई है। इसलिए इस संपत्ति का मालिकाना हक वक्फ कानून के मुताबिक दिल्ली वक्फ बोर्ड के पास है।
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