वेश्यावृत्ति का केंद्र बनी सोशल नेटवर्किंग साइट्स - Khabar NonStop
इंदौर। गुरुवार को ऑनलाइन एस्कॉर्ट सेवा वेबसाइट के ऑपरेटर की गिरफ्तारी के बाद, मध्य प्रदेश साइबर पुलिस की रडार में मोबाइल नंबरों की बड़ी संख्या आ गई है। इन नंबरों के बीच व्हाट्सएप के माध्यम से हुई बातचीत साइबर पुलिस द्वारा ट्रैक की जा रही है।
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शहर भर में फैलाया व्हाट्सएप नंबर
साइबर सेल के एसपी जितेन्द्र सिंह ने बताया “हमने एक वेश्यावृत्ति समूह को चिन्हित किया है, जिसने शहर भर में एक व्हाट्सएप नंबर को फैलाया है। वे प्रत्येक सप्ताह वेश्याओं की तस्वीर के साथ प्रोफाइल फोटो अपडेट करते हैं और ग्राहक अगर उन्हें पसंद करते हैं तो उनके पास पहुंचते हैं।” डिजिटल युग में अपने ग्राहकों को बढ़ाने के उद्देश्य से, शहर आधारित एस्कॉर्ट सर्विस एजेंसियों ने भी अपने ग्राहकों तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करना शुरू कर दिया है। साइबर पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया अब ऐसे विज्ञापनों के लिए केंद्र बन गया है।
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ऐसे तय होता है सौदा
इसके अलावा, सोशल मीडिया के माध्यम से वेश्यावृत्ति के दलालों का मोबाइल नंबर, अवैध चित्र, वीडियो और अन्य वेबसाइटों तक पहुँचने वाली लिंक्स भी शेयर की जा रही हैं। शून्य लागत में विज्ञापन होने के कारण, छोटे एजेंटों ने अब सोशल मीडिया पर विज्ञापन पोस्ट करने का सहारा लिया है। व्यापार का यह मॉडल सरल है, एजेंट ग्राहक के नाम और पते के बारे में कोई सवाल नहीं पूछते हैं। जब ग्राहक सेवा और आवश्यकता चाहता है आवश्यकता के आधार पर मीटिंग से पहले व्हाट्सएप के माध्यम से फोटो का आदान-प्रदान होता है।
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इतने मूल्य में तय होता है सौदा
इस धंधे में वेश्याओं का सौदा 10,000 रुपए से लेकर 2, 00,000 तक तय होता है। मुख्य पृष्ठ पर काम करने वाले दलाल अपने सौदे के अनुसार प्रत्येक ग्राहक पर अपना कमीशन प्राप्त करते हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे इनफार्मेशन लगातार पोस्ट करके तमाम एजेंसीज आसानी से अपने ग्राहकों तक पहुँच जाती है।
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