दिल्ली की सर्दी! - Khabar NonStop
शंभूनाथ शुक्ल
हर साल जैसे ही जाड़े आने को होते हैं, दिल्ली में धुआँ, धूल और कोहरे की चादर छा जाती है। यह चादर इतनी घनी और विषैली होती है कि न तो कुछ दिखता है न सहजता से सांस लेते बनता है। इन दिनों न तो अधिक ठण्ड होती है न इतनी गर्मी कि एसी चलाए जाएं। नतीजा यह होता है कि पूरी दिल्ली में लोग इस विषैली और जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर होते हैं। जब तक ऐसा मौसम रहता है मीडिया में चर्चाएँ होती हैं, एनजीटी भी सक्रिय रहता है और सरकारें अपने हिसाब से शिगूफे छोड़ती हैं। यह पहला मौका है कि केंद्र में तथा पड़ोसी राज्यों यूपी, हरियाणा और राजस्थान में एक ही पार्टी की सरकार हैं लेकिन किसी ने भी इस संकट से दिल्ली को उबारने में कोई पहल नहीं की।
किसी भी सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। अलबत्ता प्रदूषण के बहाने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के माथे ठीकरा फोड़ा जा रहा है। केंद्र सरकार इस प्रदूषण से निपटने की बजाय मज़े ले रही है क्योंकि इस बहाने केजरीवाल को घेरना आसान है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी बढ़ते प्रदूषण और दिल्ली के आबोहवा पर चिंता जाहिर की है। स्मॉग और प्रदूषण पर राहुल गांधी ने शायराना अंदाज में पीएम नरेंद्र मोदी पर चुटकी लेते हुए ट्वीटर पर लिखा, “ सीने में जलन, आंखों में तूफ़ान सा क्यों है इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यों है? क्या बताएंगे साहेब, सब जानकर अनजान क्यों हैं?”
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण के कारण इमर्जेंसी जैसी स्थिति है और इससे निपटना तुरंत आवश्यक है। बढ़ते प्रदूषण पर कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ यूपी, पंजाब, दिल्ली और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा, ‘दिल्ली और आसपास प्रदूषण का स्तर चिंताजनक है और यह गंभीर समस्या है। राज्य सरकारों को बताना होगा कि इससे निपटने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं।’ कोर्ट ने प्रदूषण को रोकने के लिए राज्य सरकारों से हवा को शुद्ध करने के उपाय के साथ ई-रिक्शा जैसे उपायों को बढ़ावा देने का सुझाव भी दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की चार प्रमुख मांगों पर नोटिस जारी किया है। प्रदूषण को लेकर याचिकाकर्ता ने मांग कि पराली जलाने पर रोक लगे, धूल पर नियंत्रण के लिए वैक्यूम क्लीनिंग, पानी का छिड़काव जैसे उपाय किए जाएं, सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाया जाए और बिजली से चलने वाले ई-रिक्शा जैसे वाहनों को बढ़ावा दिया जाए। पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में प्रदूषण के चलते लोगों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसे काबू करने के लिए दिल्ली सरकार ऑड-ईवन लागू करना चाहती है लेकिन एनजीटी और दिल्ली सरकार के बीच कुछ शर्तों को लेकर पेंच फंस गया और वो पेंच अब भी बरकरार है। आज इस पर एनजीटी में सुनवाई होनी थी लेकिन केजरीवाल सरकार की ओर से पक्ष रखने के लिए कोई पहुंचा ही नहीं।
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