जन्मदिन स्पेशल: तमाम उतार-चढ़ाव से भरा रहा आडवाणी का जीवन - Khabar NonStop
लाल कृष्ण आडवाणी एक अनुभवी राजनेता और भारतीय जनता पार्टी के भूतपूर्व अध्यक्ष है।इनके जीवन में बहुत से उतार चढ़ाव आते रहे हैं। वे भारतीय राजनीति के सभी आदरणीय चेहरों में लाल कृष्ण आडवाणी एक हैं। इनका जन्म 8 नवम्बर 1927 को कराची, पाकिस्तान में हुआ था। आज ये 90 वर्ष के हो चुके है।
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राजनैतिक सफर
इनका राजनैतिक सफ़र विवादों से भरपूर रहा है, चाहे वो जिन्नाह प्रकरण हो, हवाला कांड हो या फिर बाबरी मस्जिद विध्वंस। उनके उच्च बौध्दिक स्तर, अडिग सिद्धांत और आदर्शो ने उन्हें इन सारी परिस्थितियों से लड़ने में मदद की और उन की राजनैतिक महत्वाकांक्षाओ को नई उंचाई पर ले गए। एल.के. आडवाणी का व्यक्तित्व प्रभावशाली और दृढ निश्चय से भरपूर है और इसी वजह से वे आज भी कई लोगों के प्रेरणा स्तोत्र हैं।
प्रारंभिक जीवन
एल. के. आडवाणी का जन्म अखंड भारत के करांची, सिंध प्रान्त, में किशनचंद डी आडवाणी और ज्ञानी देवी के घर हुआ था। उनकी शिक्षा सेंट पेट्रिक हाईस्कूल और दयाराम गिडूमल नेशनल कॉलेज, पाकिस्तान, से हुई। बाद में उन्होंने गवर्मेंट लॉ कॉलेज, बॉम्बे, से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की।
-एल के आडवाणी ने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की थी। मॉडल हाईस्कूल, करांची, में वह अंग्रेजी, गणित, इतिहास और विज्ञान जैसे विषय पढाते थे।
-इनके राजनैतिक सफ़र की शुरुआत तब हुई जब वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सचिव चुने गए। कुछ सालों बाद उन्हें भारतीय जनसंघ का सदस्य चुना गया।
-हर तरह की जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्हें आख़िरकार अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया। इसी दौरान जन संघ अन्य राजनैतिक पार्टियों के करीब आया और जनता पार्टी का निर्माण हुआ।
-पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में आपातकालीन शासन की अलोकप्रियता ने जनता पार्टी के सत्ता में आने के रास्ते खोल दिए।
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-इस सरकार में आडवानी को सूचना और प्रसारण मंत्रालय सौंपा गया। आतंरिक कलह और एकजुटता की कमी के कारण जनता पार्टी सरकार ज्यादा लम्बे समय तक कार्य नहीं कर पाई।
-एल के आडवाणी ने राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी का प्रतिनिधित्व किया। 1986 में एल के आडवाणी को भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
-सन 1989 के चुनावों में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए 89 सीटों पर कब्ज़ा किया और नेशनल फ्रंट को सरकार बनाने के लिए बाहर से समर्थन दिया।
-वर्ष 1991 के रथयात्रा के दौरान जब आडवानी को बिहार में गिरफ्तार किया गया तब बीजेपी ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया।
– वर्ष 2004 के चुनाव में सत्ता में वापसी की उम्मीद के बावजूद NDA गठबंधन कांग्रेस से पीछे रह गयी और कांग्रेस के नेतृत्व में यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायन्स (यूपीए) ने सरकार बनायी।
– वर्ष 2009 के लोक सभा चुनावों में आडवानी को बीजेपी का प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया गया, बहुत प्रचार-प्रसार के बाद भी उन्हें इसमें सपलता नहीं मिली। लेकिन भारतीय जनता पार्टी को बनाने में इनका बहुत बड़ा योगदान रहा है।
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