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कश्मीर में ‘वार्ताकार’ की नियुक्ति, बीजेपी की लोगों को गुमराह करने की साजिश - Khabar NonStop

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श्रीनगर। कश्मीर मामले पर बातचीत के लिए केंद्र सरकार के नव नियुक्त वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा सोमवार को अपनी पहली श्रीनगर यात्रा पर पहुंच रहे हैं। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह वार्ताकार की नियुक्ति के विरोधाभास को दूर करे और प्राप्त जनादेश से इस मसले को हल करे।

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधान मंत्री डॉ मनमोहन सिंह के नेतृत्व की सरकार में नीति और योजना समूह के सदस्य रहे तारिक हमीद कर्रा ने केंद्र सरकार से पूछा है कि जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल के मसले पर बातचीत के लिए दिनेश्वर शर्मा को भेजा भेजा जा रहा है या नहीं। उन्होनें कहा कि सरकार को कश्मीर मुद्दे का समाधान करने के लिए जनादेश मिला है। कांग्रेस नेता कर्रा ने जोर देते हुए कहा, यदि दिनेश्वर शर्मा का कार्य शांति बहाल करने के लिए काम करना था, तो उन्हें पुलिस अधिकारियों और मुख्यधारा के राजनेताओं से मुलाकात करना चाहिए।

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कर्रा ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वार्ताकार की नियुक्ति के नाम पर, भारत सरकार न केवल देशवासियों की भावनाओं का फायदा उठाने का प्रयास कर रही है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने का भी प्रयास कर रही। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जम्मू-कश्मीर में दो बार पूर्व प्रधान मंत्री डॉ मनमोहन सिंह के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय नीति एवं योजना समिति का गठन करने के लिए एक दूरदर्शी पहल की थी, यह राज्य में अलगाववादी लोगों के साथ वार्ता के लिए अच्छा माध्यम बनता।

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पीआरपीपी समूह के गठन के विचार के पीछे मुख्य रणनीतिकार रहे कर्रा ने कहा कि सरकार बातचीत को शुरू करने के नाम पर पूरे भारत के लोगों की भावनाओं के साथ खेल और शोषण करने की कोशिश कर रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस संबंध में स्वेच्छा से भ्रम पैदा कर लिया है और सरकार को अभी भी यह स्पष्ट करना है कि वार्ताकार वास्तव में शांति बहाल के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा जब गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सिर्फ दो घंटे बाद वार्ताकार की नियुक्ति की घोषणा की। मोदी सरकार में एक कनिष्ठ मंत्री ने गृह मंत्री की घोषणा के विरोध का प्रयास किया और कहा कि बातचीत की कोई आवश्यकता नहीं है।

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कर्रा ने बीजेपी के वरिष्ठ वरिष्ठ नेता और पूर्व पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के विरोध के लिए भाजपा के सदस्यों पर चुटकी लेते हुए कहा कि जम्मू और कश्मीर राज्य के उपमुख्यमंत्री की भी अपनी अलग पेशकश थी। उन्होंने उपहास करते हुए कहा, “हुर्रियत के साथ वार्ता भी होगी, लेकिन केवल उन लोगों के साथ जो एनआईए द्वारा जेल गए हैं।” कांग्रेस नेता ने राज्य को ‘वार्ताकार’ भेजने के फैसले के पीछे के मकसद पर सवाल उठाया और कहा कि अगर भारत सरकार वार्ता के लिए उच्चतम न्यायालय को अनुच्छेद 35-ए पर सुनवाई स्थगित करने के लिए अनुरोध कर सकती है। तो इसकी घोषणा के बाद भी कश्मीर में छापा मारने से एनआईए को वापस क्यों नहीं लिया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार ने कश्मीर मसले पर एक तरफ सुप्रीमकोर्ट की करवाई को रोक रहा है वहीं दूसरी तरफ लोगों के बीच एनआईए के आतंक को कम करने का प्रयास नहीं कर रही। तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि बीजेपी की यह रणनीति काम नहीं करेगी।

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गौरतलब हो दिनेश्वर शर्मा को केंद्र सरकार ने कश्मीर में शांति-बहाल करने के लिए वार्ताकार के रूप में चुना है। कश्मीर मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा का जम्मू-कश्मीर दौरा आज से शुरू होगा। दिनेश्वर शर्मा आईबी के मुखिया रह चुके हैं। केंद्र सरकार के विशेष प्रतिनिधि के रूप में अलगाववादियों से वार्ता करने के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचेंगे। शर्मा श्रीनगर में चार दिन और जम्मू में दो दिन रुकेंगे। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक दिनेश्वर शर्मा अपने एक सप्ताह के दौरे के दौरान छात्र नेताओं सहित कई अलगाववादी समूहों और व्यक्तियों से मिलेंगे।

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