नए घर में खुशहाल जीवन जीने के लिए अपनाये ये वास्तु टिप्स !
इंटरनेट डेस्क: वर्तमान समय में, हमारे देश में वास्तु विशेषज्ञों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। इन सभी के अनुसार वास्तु शास्त्र के नियम और सिद्धांतों अलग अलग हो सकते है। अगर आप नए घर का निर्माण कर रहे है या रहने जा रहे है तो आपको नीचे दिए गए वास्तु टिप्स ध्यान में रखने चाहिये –
पूर्व निर्माण – व्यक्ति को नए घर का निर्माण शुरू करने से पहले भूमि पूजा जरूर करनी चाहिए। इसे एक शुभ शुरुआत माना जाता है और भवन निर्माण की आगे की कार्यवाही के लिए यह एक अच्छी शुरुआत रहती है।
घर का प्रवेश द्वार – किसी भी घर के प्रवेश द्वार के लिए पूर्व सबसे शुभ दिशा है। इसका कारण यह है कि सूरज पूर्व में उगता है और कहा जाता है कि वह घर में सकारात्मक ऊर्जा और प्रकाश को लाता है। इसके अलावा घर के प्रवेश द्वार के लिए उत्तर-पूर्व दिशा भी सही मानी जाती है।
रसोईघर की स्थिति – घर का दक्षिण-पूर्व कोना रसोईघर के लिए सबसे आदर्श स्थान है और और खाना पकाते समय चेहरा पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए। इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखें कि रसोईघर कभी भी मुख्य द्वार के ठीक सामने नहीं होना चाहिए।
मास्टर बेडरूम – पूर्व की तरफ मुख्य द्वार वाले घर में मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम कोने में स्थित होना चाहिए। अगर आप रसोई और बेडरूम की इस स्थिति को ध्यान में रखते है तो आप खुशबू या खाना पकाने की वजह से होने वाले शोर से जागने के बिना आराम से सो सकते है। आपको वर्गाकार या आयताकार बेडरूम बनवाना चाहिये ताकि आप घर के दूसरे हिस्सों का निर्माण और अधिक बेहतर कर सकें।
टॉयलेट की स्थिति – वास्तु के साथ-साथ सामान्य स्वास्थ्य और सौंदर्यशास्त्र के हिसाब से भी टॉयलेट की स्थिति एक और महत्वपूर्ण पहलू है। टॉयलेट घर या कमरे के उत्तर-पश्चिम कोने में स्थित होना चाहिए। यदि यह संभव नहीं है, तो आप टॉयलेट दक्षिण पूर्व दिशा में भी बनवा सकते है। इसके अलावा घर में टॉयलेट, रसोईघर और पूजा का कमरा एक दूसरे के पास नहीं होना चाहिए।
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