यहां लड़की के पहली बार मासिक धर्म आने पर मनाते हैं उत्सव..
इंटरनेट डेस्क। हर स्त्री को प्रत्येक माह में इस भंयकर बीमारी से गुजरना पड़ता है, स्त्रीयांे की इस बीमारी का नाम है पीरीयड्। यह स्त्रीयों के शरीर में होने वाली एक प्राकृतिक क्रिया है। पहले के वक्त सुविधाओं की कमी होने के कारण सैनेटरी नैपकीन जैसी कोई चीज नही थी। पीरीयड् के दौरान स्त्रीयों को पांच दिन बड़ी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।
लेकिन देश के कुछ हिस्सों में स्त्रीयों की इस परेशानी को समझते हुए। उन्हें राहत देने के लिए कुछ रीति रिवाज व रस्में बनाई गई है। जिससे उन्हें इस कठिनाई से कुछ आराम मिल सके। इन रीति-रिवाजों और परंपराओं को आज भी देश के कई भांगों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
कर्नाटकः पीरियड् के दिनों की तकलीफ सिर्फ औरतेें ही समझ सकती हैं। कर्नाटक में पहले पीरियड के दौरान घर और आस-पास की महिलाएं मिलकर खुशी मनाती हैं। लड़की की आरती करती हैं और उस लड़की को तिल और गुड़ से बने चिगली उंडे नाम के पकवान को खिलाती है। ऐसा कहा जाता कि इस पकवान को खाने से खून के बहाव में कोई रूकावट नहीं आती है। इस दौरान घर आए मेहमानों को फूल, नारियल और पान के पत्ते भी उपहार स्वरूप दिए जाते हैं।
तमिलनाडुः तमिलनाडु में भी पहले पीरियड को बड़ी खुशी से मनाया जाता है। पुराने समय से निभाई जाने वाली इस परंपरा को Manjal Neerattu Vizha नाम से जाना जाता है। इस दौरान उस लड़की को सिल्क की साड़ी पहनाई जाती है और तमिलनाडु में यह परंपरा विवाह की मनाया जाता है।
असमः असम में यह तुलोनी बिया नाम की परंपरा निभाई जाती है। पीरियड् के समय लड़की को पांच दिन अलग कमरे में रखा जाता है। जिस जगह केवल महिलाएं ही जा सकती है पुरूषों का वहां जाना वर्जित होता है। इसके साथ ही दो जोड़ी छाली को लाल कपड़े में बांधकर पड़ोसी के घर रखा जाता है और इस छाली की पूजा पड़ोसी के घर ही होती है। सात सुहागिन औरतें लड़की को नहलाती हैं, उसे दुल्हन की तरह सजा कर छाली की पूजा की जाती है।
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