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आखिर क्यों ? सुबह के टाइम ही दी जाती है कैदी को फांसी, जानिए…..

रोचक डेस्क। हमारे देश में जिस भी दोषी को फांसी की सजा होती है, सूर्योदय से पहले दी जाती है। ऐसा कई दशकों से चलता आ रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि फांसी की सज़ा सुबह सूर्योदय से पहले ही क्यों दी जाती है। अक्सर ये सवाल पूछा जाता है कि क्यूँ फांसी का समय सूर्योदय से पहले रखा जाता है तो हम आपको बताएंगे कि ऐसा आख़िर क्यों होता है।

1.फांसी वक्त सुबह-सुबह का इसलिए मुकर्रर इसलिए किया जाता है क्योंकि जेल मैन्युअल के तहत जेल के सभी कार्य सूर्योदय के बाद किए जाते हैं। फांसी के कारण जेल के बाकी कार्य प्रभानित ना हो ऐसा इसलिए किया जाता है।

2.फांसी के दस मिनट बाद डाक्टरों का पैनल फांसी के फंदे में ही चेकअप कर बताता है कि वो उस शख्स की मौत हुई है नहीं। उसके बाद उसे फांसी के फंदे से उतारा जाता है।

3.फांसी देते वक्त वहां पर जेल अधीक्षक, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट और जल्लाद मौजूद रहते है। इनके बिना फांसी नही दी जा सकती।

4.फांसी देने से पहले जल्लाद बोलता है कि मुझे माफ कर दिया जाए। हिंदू भाईयों को राम-राम, मुस्लमान भाईयों को सलाम, हम क्या कर सकते है हम तो हुकुम के गुलाम हैं।

5.फांसी पर लटकाने के दस मिनट बाद डाक्टरों की एक टीम सजा पाने वाले की जाँच करती है और मरने की पुष्टि होने पर उसे नीचे उतार लिया जाता है।

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