डूबते हुए इंसान को बचाना क्यों है पाप? जानिए हैरतअंगेज घटना….
रोचक डेस्क। यह सुनने अजीब और गरीब सा किसा लगता है लेकिन यह सच बिल्कुल सच है। रुरु एक स्वर्ण-मृग का नाम था। वह मनुष्य के जैसे बातचीत कर सकता था। एक दिन उसने एक डूबते हुए देखा और उस आदमी को बचाया भी तभी उस आदमी ने धन्यवाद देना चाहा, तो उसने कहा कि अगर सच में धन्यवाद देना चाहते हो, तो किसी को नहीं बताना कि तुम्हें किसी स्वर्णमृग ने बचाया है। अगर यह बात लोग मेरे बारे में जानेंगे, तो निस्संदेह मेरा शिकार करना चाहेंगे।
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कालांतर में उसी राज्य की रानी ने स्वप्न में रुरु के साक्षात् दर्शन किये। उसकी सुंदरता देख रानी को उसे पाने की लालसा हुई। तत्काल उसने राजा से रुरु को ढूंढकर लाने के लिए कहा। राजा ने घोषणा कर दी।
यह घोषणा उस व्यक्ति ने भी सुन ली, जिसे रुरु ने बचाया था। बिना एक क्षण गंवाए, वह राजा के दरबार में पहुंचा और रुरु के बारे में सब कुछ बता दिया। राजा और उसके सिपाहियों ने उसकी निशानदेही पर रूरू को ढूंढ निकाला। रुरु ने कहा, राजन! तुम मुझे मार डालो, मगर पहले यह बताओ कि तुम्हें मेरा ठिकाना कैसे मालूम हुआ?
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तब राजा ने उस व्यक्ति की तरफ इशारा किया, जिसकी जान रुरु ने बचाई थी। रुरु के मुख से तभी एक वाक्य हठात निकला। उसका अर्थ स्पष्ट नहीं था। राजा ने जब रुरु से उसका आशय पूछा, तो रुरु ने बताया कि बहती हुई लकड़ी को बचा लेना ठीक है, जिसका कोई उपयोग नहीं, पर मनुष्य को निकालना ठीक नहीं है।
राजा ने इस कथन का संदर्भ पूछा, तो रूरू ने उस व्यक्ति के डूबने और बचाए जाने की पूरी कहानी सुनाई। रुरु की करुणा ने राजा की करुणा को भी जगा दिया था। उस व्यक्ति की कृतघ्नता पर उसे रोष भी आया। राजा ने जब उस व्यक्ति का संहार करना चाहा, तो मृग ने फिर अनुरोध किया कि उस व्यक्ति का वध न किया जाए। यह कहते ही मृग अपना शरीर छोड़कर दिव्यदेह धारी हो गया।
Note:- यह केवल एक कहानी है !
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