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प्याज़ और कोड़ा दोनों ही खा रही है बीजेपी! - Khabar NonStop

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शंभूनाथ शुक्ल

एक किस्सा है कि कैसे एक चतुर-सुजान ने अपनी अत्यधिक चतुराई के कारण सौ जूते भी खाए और सौ कोड़े भी। किस्सा यह है कि एक राज्य में एक आदमी को यह घमंड हो गया कि उससे ज्यादा चतुर कोई नहीं है। और वह हर कानून और नियम से ऊपर है। वह एक बार कानून की अवहेलना करता पकड़ा गया तो उसे राजा के समक्ष पेश किया गया। उस कानून को तोड़ने की दो तरह की सजाएं थीं। एक या तो वह आदमी सौ प्याज खाए अथवा सौ कोड़े। उस व्यक्ति ने सोचा कि सौ कोड़े कुछ ज्यादा ही है और प्याज खाना आसान है इसलिए उसने सौ प्याज खाना मंजूर कर लिया। पहरेदार उसके लिए प्याज़ की टोकरी ले आए मगर दस प्याज़ खाते ही उसका बुरा हाल। उसने राजा से निवेदन किया कि उसे सौ कोड़े मार लिए जाएँ। लेकिन दस कोड़ों से ही उसकी पीठ छलनी हो गई तो वह फिर राजा से गिड़गिड़ाया कि उसे प्याज़ खाने की अनुमति दी जाए। इस प्रकार कभी प्याज़ तो कभी कोड़े के चक्कर में वह बेचारा सौ प्याज़ भी खा गया और सौ कोड़े भी। यही हाल आजकल बीजेपी का होता जा रहा है। अपने हर क़दम से वह बात-बात पर कोसी जाती है और जब खूब खिंचाई करवा लेती है तो फैसला पलट देती है।

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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह, राहुल गाँधी और अब इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट (एफटीआईआई) के निदेशक पद पर गजेन्द्र चौहान को हटाकर बीजेपी ने अपनी इसी मानसिकता का परिचय दिया है। बीआर चोपड़ा के टीवी सीरियल महाभारत में युधिष्ठिर का रोल कर चुके गजेन्द्र चौहान को मोदी सरकार ने आते ही इस संस्थान का निदेशक बना दिया। जिस संस्थान से अमिताभ बच्चन, जया भादुड़ी जैसे कलाकार निकले हों वहां का निदेशक एक अनजान व्यक्ति को बना देने पर खूब हंगामा हुआ। वहां के छात्रों ने हड़ताल भी की लेकिन सरकार अपनी भूल सुधरने को राजी ही नहीं थी। तब कई लोगों ने सुझाया भी कि सरकार को यदि अपनी ही लाबी से किसी का चयन करना था तो अनुपम खेर और किरण खेर हो सकते थे। कलाकार भी बड़े हैं और उनकी प्रतिष्ठा भी है। किरण खेर तो स्वयं भाजपा की ही चंडीगढ़ से लोकसभा सदस्य हैं।

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किन्तु सरकार ने किसी की नहीं सुनी। जबकि गजेन्द्र चौहान के पास फिल्म से सम्बंधित कोई एकेडेमिक योग्यता भी नहीं थी। उन्होंने तो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान से रेडियोग्राफी में डिप्लोमा किया हुआ लेकिन अभिनय में रूचि के चलते वे मुंबई चले गए जहाँ काफी भटकने के बाद उन्हें टीवी सीरियल महाभारत में युधिष्ठिर का रोल मिल गया। साल 2004 में चौहान बीजेपी में शामिल हुए और उसकी कल्चरल विंग के राष्ट्रीय संयोजक हो गए। साल 2014 में जब केंद्र बीजेपी की सरकार बनी तो अगले ही साल 9 जून को उन्हें फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट का निदेशक बना दिया गया। खूब भारी विरोध को दरकिनार कर उन्हें उनके इस पद पर रहने दिया गया। लेकिन पिछले कुछ दिनों से जब से जय शाह के मामले के उछलने के बाद से सरकार चौतरफा घिरी है तब से उसने अपने कई फैसले उलटने शुरू कर दिए। उसी कड़ी में गजेन्द्र चौहान को निदेशक पद से हटाकर अनुपम खेर की उस पद पर नियुक्ति हुई।

ठीक इसी तरह जीएसटी में ढील मिली। दो लाख तक की स्वर्ण खरीद पर पैन कार्ड की बाध्यता ख़त्म की गई। राहुल गाँधी बर्कले विश्विद्यालय गए तो उनके भाषण को काउन्टर करने अब अरुण जेटली बर्कले जा रहे हैं। राहुल ने गुजरात में डेरा डाला तो घबराई भाजपा ने स्मृति ईरानी को अमेठी भेजा। सरकार इस हड़बड़ी में सामान्य शिष्टाचार भी भूल गई। स्मृति ईरानी के अमेठी दौरे को कवर करते हुए आल इंडिया रेडियो ने बताया कि केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी अपने चुनाव क्षेत्र अमेठी का दौरा कर रही हैं। आल इंडिया रेडियो अपनी चापलूसी में यह भी भूल गया कि चुनाव क्षेत्र निर्वाचित उम्मीदवार का होता है पराजित का नहीं। सरकार की यह हड़बड़ी उसकी घबराहट को ज़ाहिर कर रही है। सरकार को ऐसे मौके पर सदाशयता का परिचय देना चाहिए। हड़बड़ी में ऊट-पटांग फैसले नहीं करने चाहिए।

दरअसल बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह की संपत्ति को लेकर वायर में छपी खबर से पार्टी घबरा गई है। जबकि सच तो यह है कि जय शाह के साथ सिर्फ यही फेवर हुआ कि उन्हें तत्काल क़र्ज़ दिया गया। क़र्ज़ वापस भी हो गया और उस क़र्ज़ से जय शाह को कोई बहुत लाभ नहीं हुआ लेकिन उनका टर्नओवर बढ़ गया। अब भाजपा इस मामले को दबाने में लगी है। पहले तो केन्द्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने सफाई दी फिर जिस वकील को लगाया गया वह सरकारी वकील था। इससे लगता है कि सरकार के नीति-निर्धारक सोच-समझ कर कदम नहीं उठा रहे। दरअसल सच तो यह बीजेपी इतने वर्ष विरोध में रही है कि उसे राज करना नहीं आता और कांग्रेस ने इतना सत्ता-सुख भोग है कि उसे विरोध जताना नहीं आता। वह तो शुक्र हो वामपंथियों का, जिन्होंने सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोल रखा है। कांग्रेसी तो बस मूक-दर्शक बने हुए हैं।



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