ये हो सकता है कश्मीर समस्या का हल ! - Khabar NonStop
पिछले 70 सालों से जब से भारत आजाद हुआ है, कश्मीर समस्या चली आ रही है। ना सिर्फ चली आ रही है, ब्लकि दिनों-दिन बढ़ती भी जा रही है, लेकिन दुख की बात है कि अभी तक कश्मीर समस्या का कोई ठोस हल नहीं निकल सका है। भारत की तरफ से बात होती है कि कश्मीर से धारा 370 खत्म की जाए, ताकि कश्मीर का भारत में पूरी तरह से विलय हो सके। वहीं पाकिस्तान का कहना है कि पूरा कश्मीर उसे चाहिए। जबकि कश्मीरी लोग अपने आप को स्वतंत्र देश के रुप में देखना चाहते हैं। अब चूंकि कश्मीर को लेकर सभी की सोच अलहदा है, शायद यही कारण है कि आज तक कश्मीर समस्या हल नहीं हो पायी है। लेकिन इसके अलावा अगर देखें तो कुछ और समस्याएं भी है, जिस कारण कश्मीर समस्या 70 साल बाद भी अनसुलझी है।
कश्मीर समस्या बढ़ने के कारण
लोकतंत्र की कमजोरी
कश्मीर समस्या का एक मूल कारण वहां लोकतंत्र की जड़े मजबूत ना होना है। ऐसा नहीं है कि कश्मीर में चुनी हुई सरकारें नहीं हैं या फिर लोगों को किसी दबाव में वोट देना पड़ता है। लोकतंत्र से यहां मतलब सभी कश्मीरियों का कश्मीर मुद्दे पर एकमत होना है। अभी हालात यह है कि कश्मीर में कुछ लोग भारत समर्थक हैं, वहीं कुछ लोग पाकिस्तान समर्थक। इनके अलावा कुछ ऐसे भी लोग हैं जो कश्मीर को शरीयत की नजर से देखते हैं और वहां पूरी तरह से इस्लामी कल्चर को लागू करना चाहते हैं। लेकिन सभी लोग किसी एक बात के लिए राजी नहीं है। यही सबसे बड़ा कारण है कि कश्मीर समस्या अभी तक उलझी हुई है। जिस दिन कश्मीर की जनता एकमत हो गई, उस दिन से ही कश्मीर समस्या का हल निकलना शुरु हो जाएगा।
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धार्मिक चरमपंथ
कश्मीर में धार्मिक चरमपंथ का उभार भी कश्मीर समस्या सुलझाने में एक बड़ी समस्या है। बता दें कि जब कश्मीरियत की बात होती है तो उसमें कश्मीरी मुस्लिमों की भी बात होती है, उसमें कश्मीरी पंडितों की भी बात होती है, और सिखों की भी बात होती है। लेकिन दुख की बात है कि आज के समय में कश्मीरियत सिर्फ कश्मीरी मुस्लिमों के इर्द गिर्द सिमट गई है। 1990 में जिस तरह से कश्मीरी पंडितों को रातों-रात कश्मीर से निकाला गया था, वह घटना ऐसा दाग देकर गई है कि कश्मीर आज तक उस दाग से पीछा छुड़ा रहा है।
आतंकवाद
कश्मीरी लोगों की मांग ऑटोनॉमी या फिर सेल्फ रुल की रही है, लेकिन अगर कश्मीरी लोग ऑटोनॉमी या फिर सेल्फ रुल चाहते हैं तो उन्हें सबसे पहले आतंकवाद से मुंह मोड़ना होगा। आज जिस तरह से आतंकियों को कश्मीर घाटी में समर्थन मिल रहा है और जिस तरह से आतंकी कश्मीरी आवाम के हीरो बन रहे हैं, ऐसे तो कश्मीर समस्या का हल होना संभव नहीं है। क्योंकि भारत के लाखों फौजी कश्मीर या उसके आस-पास तैनात है। ऐसे में यह छद्म युद्ध सालों साल चलता रहेगा और शायद ही इसका कोई हल निकले।
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क्या हो कश्मीर समस्या का हल
कश्मीर समस्या के अगर हल की बात करें तो इसके शायद 2 ही हल हो सकते हैं। दोनों ही हल कश्मीर की जनता को ध्यान में रखते हुए सुझाए गए हैं –
कश्मीर में सेल्फ रूल
कश्मीर के शासन की ताकत कश्मीरियों को देकर कश्मीर समस्या का हल हो सकता है। जिस तरह से म्यांमार, बता दें कि म्यांमार के रक्षा और विदेश मामले भारत सरकार देखती है। अगर इसी तरह से कश्मीर की जनता को शासन की ताकत दे दी जाए, लेकिन कश्मीर के रक्षा और विदेश मामलों को भारत सरकार देखे तो एक हद तक कश्मीर समस्या का हल हो सकता है। ये एक ऐसी स्थिति हो सकती है, जिसमें शायद ही किसी का नुकसान हो।
कश्मीर का भारत में विलय
दूसरा उपाय कश्मीर समस्या का फिर ये ही हो सकता है कि कश्मीर से धारा 370 हटायी जाए और कश्मीर का भारत में पूरी तरह से विलय हो जाए। आम भारतीय कश्मीर में इंडस्ट्री लगा सकें और कश्मीर में प्रॉपर्टी खरीद सकें। ताकि कश्मीर में रोजगार, और सम्पन्नता आए और आतंकवाद, अलगाववाद और धार्मिक चरमपंथ कहीं पीछे छूट जाए।
बता दें कि यह हल भारत की मौजूदा अन्तर्राष्ट्रीय छवि को ध्यान में रखते हुए सुझाए गए हैं। क्योंकि आज जिस तरह से भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, और एक ताकतवर मुल्क है। ऐसे में वह कश्मीर में शायद ही पाकिस्तान को कोई बड़ा रोल दे।
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