“कांग्रेस का घोर हिंदू विरोध ही उसे ले डूबा!” - Khabar NonStop
शंभूनाथ शुक्ल
वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस इसलिए हारी क्योंकि वह मुसलमानों के तुष्टीकरण में जुट गई थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटोनी के बाद अब कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता और कई बार मंत्री रह चुके तथा पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सीधे-सीधे सोनिया गाँधी पर निशाना साधा है। अपनी किताब “गठबंधन के दिन; 1996-2012” में उन्होंने 2004 में काँची कामकोटि के शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया है। उन्होंने लिखा है कि किसी मुस्लिम धर्मगुरु को ईद की पूर्वसंध्या पर अथवा क्रिशमस के रोज़ किसी ईसाई पादरी की गिरफ्तारी की बात सोची भी नहीं जा सकती। लेकिन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हिंदुओं के सबसे बड़े धर्मगुरू काँची पीठ के शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती को ऐन दीवाली के रोज़ साल 2004 में गिरफ्तार कर लिया गया था। कांग्रेस के ही मंत्री रह चुके एक अन्य पूर्व राष्ट्रपति वेंकटरमण और पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपाई ने इसका तीखा विरोध किया था। मगर कांग्रेस का मुख्य ध्येय उस वक़्त हिंदू विरोध ही था।
सच्चाई तो यह है कि 2014 में बीजेपी को जो अभूतपूर्व विजय मिली थी उसके पीछे मोदी करिश्मे का असर तो था लेकिन हिंदू सैंटीमेंट्स भी थे। दरअसल वृहत हिंदू समाज को लग रहा था कि कांग्रेस की यूपीए सरकार हिंदुओं के प्रति एक वितृष्णा का भाव रखती है। कांग्रेस की मनमोहन सरकार के कुछ मंत्रियों ने अपनी बयानबाज़ी और खुद को कहीं ज्यादा मायनारिटी का खैरख्वाह जताने के लिए ऐसे बयान दिए और हरकतें कीं जिससे अधिकांश हिंदुओं के मन में यह बात गहरे पैठ गई कि यह सरकार हिंदू विरोधी है। खासकर साल 2004 में ऐन दीवाली के दिन 11 नवम्बर को कांची कामकोटि के शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी का बहुत ख़राब असर पड़ा। इसके बाद लगातार ऐसी हरकतें होती रहीं। स्वामी जयेंद्र सरस्वती को जिस हत्या के आरोप में पकड़ा गया था, उसमें पुलिस पर्याप्त तथ्य नहीं जुटा पाई और गवाहों के मुकर जाने तथा सबूतों के अभाव में मुक़दमा ढीला पड़ता गया और अंत में 27 नवम्बर 2013 को पुद्दुचेरी सेशन कोर्ट से स्वामी जी बरी हुए। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पिछले दिनों कहा कि सरकार का यह कदम बेहद अफसोसनाक था। शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती ने इस दौरान मौन साध रखा। श्री मुखर्जी ने पूछा है कि क्या ईद के मौके पर या क्रिसमस पर्व पर किसी मुस्लिम या ईसाई नेता को यूँ गिरफ्तार किया जा सकता है?
मालूम हो कि जब शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती को गिरफ्तार किया गया था तब पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेई और पूर्व राष्ट्रपति वेंकटरमण ने इसका विरोध किया था। मगर तब केंद्र में सत्तारूढ़ यूपीए सरकार और तमिलनाडु की अन्नाद्रमुक सरकार को लगा कि इससे उसका मायनारिटी तथा दलित वोट बैंक पुख्ता हो जाएगा। लेकिन आम हिंदू जनमानस इससे दुखी हुआ। उसे लगता रहा कि कांग्रेस सरकार हिंदुओं को द्वितीय श्रेणी का नागरिक समझती है। बीजेपी को सत्तारूढ़ करवाने में इन हिंदू सैंटीमेंट्स का बड़ा योगदान रहा। उसके बाद हर तीसरे विस्फोट में किसी हिंदू साधू या साध्वी का पकड़ा जाना भी लोगों को सालता रहा। क्योंकि एक भी आरोप की पुष्टि नहीं हो पाईए और वे साधू तथा साध्वियां बरी होते रहे। ये सब कारनामे कांग्रेस को महंगे पड़ते और बीजेपी के खाते में प्लस होते गए। बीजेपी ने इस हिंदू साईकी को खूब समझा और इसे और हवा दी। हिंदुओं की यह डर की साईकी ही थी कि गुजरात 2002 का हिंदुओं ने स्वागत किया। और नरेंद्र मोदी लोगों के बीच हीरो बन गए।
मगर कांग्रेस इस बात को महसूस नहीं कर रही। उसके अंदर परिवारवाद और एक ही वंश के सहारे राजनीति करने की जो दासता की मानसिकता है, वह उसे इससे उबरने नहीं देती। यही कारण है कि देश के सारे काबिल और उदारवादी नेता इसके अंदर भरे पड़े हों लेकिन उसे अपने अन्दर के ये काबिल नेता दिखाई ही नहीं देते। कांग्रेस की पतन-गाथा की ये मानसिकता ही इस पार्टी को ख़त्म कर रही है।
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