Google Doodle: ‘हिमालय पुत्र’, जिन्हें अंग्रेज भी देते थे सम्मान - Khabar NonStop
नई दिल्ली। गूगल ने आज अपना डूडल भारत के हिमालय पुत्र और महान एक्सपलोरर नैन सिंह रावत को समर्पित किया है। बता दें कि नैन सिंह रावत दुनिया के पहले शख्स थे, जिन्होंने बिना किसी खास उपकरण के सबसे पहले तिब्बत का नक्शा तैयार किया था। यही कारण है कि नैन सिंह को रावत उनके इस महान योगदान के लिए अंग्रेज हुकूमत भी सम्मान देती थी।
कौन थे नैन सिंह रावत
दरअसल 19वीं शताब्दी में अंग्रेज हुकूमत भारत का नक्शा तैयार कर रहे थे। अंग्रेज भारत का नक्शा तो लगभग तैयार कर चुके थे, लेकिन अंग्रेज भारत से लगते तिब्बत का भी नक्शा तैयार करना चाहते थे। लेकिन उस वक्त तिब्बत एक रहस्यमयी जगह थी और वहां बाहरी लोगों के प्रवेश की मनाही थी। हालात ऐसे थे कि यदि कोई तिब्बत में चोरी छिपे प्रवेश कर जाता था तो उसे पकड़े जाने पर सजाए मौत की सजा दी जाती थी।
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ऐसे में अंग्रेजों ने किसी भारतीय से तिब्बत का नक्शा तैयार करने की सोची और ऐसे लोगों की खोजबीन शुरु कर दी। आखिरकार 1863 में उत्तराखंड के रहने वाले 2 भाई इस जोखिम भरे काम के लिए तैयार हो गए। ये भाई थे नैन सिंह रावत और उनका भाई मोनी सिंह रावत। अंग्रेजों ने दोनों भाईयों को ट्रेनिंग देकर दिशा मापने के लिए कंपास और तापमान मापने के लिए थर्मामीटर देकर तिब्बत भेज दिया। लेकिन मोनी सिंह रावत असफल हो गए और बीच से ही वापस लौट आए, लेकिन नैन सिंह रावत ने यह महान काम कर दिखाया।
नैन सिंह रावत ने पूरे तिब्बत में घूमकर उसका नक्शा तैयार किया। नैन सिंह रावत ने ही सबसे पहले दुनिया को बताया कि तिब्बत की राजधानी ल्हासा की समुद्र तल से ऊंचाई कितनी है ? इसके साथ ही नैन सिंह रावत ने ही दुनिया को अक्षांश और देशांतर का ज्ञान दिया। रावत ने ही दुनिया को बताया कि ब्रह्मपुत्र और स्वांग पो नदी एक ही है। इसके लिए नैन सिंह रावत ने ब्रह्मपुत्र नदी के साथ 800 किलोमीट की दूरी तय की।
इस ऐतिहासिक मौके के लिए Google ने बनाया खास डूडल
तिब्बत के अलावा नैन सिंह रावत ने कई और यात्राएं की और दुनिया को कई रहस्यों से रुबरु कराया। नैन सिंह रावत के इसी महान कार्य के कारण अंग्रेज सरकार उनका बड़ा सम्मान करती थी। अंग्रेज सरकार ने उन्हें 1877 में बरेली के पास 2 गांवों की जागीरदारी और कम्पेनियन ऑफ द इंडियन एम्पायर का खिताब सम्मान स्वरुप प्रदान किया।
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