बेटियों ने निभाया बेटे का फर्ज, पिता की अर्थी को दिया कंधा
रोचक डेस्क। कहते है कि बेटियां तो होती है पराई ये सोचकर आज भी कुछ लोग बेटी के होने पर अफसोस जताते है और इनमें से कुछ तो ऐसे भी है जो या तो बेटियों को जन्म से पहले ही मार देते है शायद वो कभी ये नहीं सोचते कि ये बेटियां पूरी उम्र उनका साथ देने के अलावा मरने के बाद भी बेटों का फर्ज निभाती है। आखिर आज भी बेटियों ने भी कई मौके पर जता ही दिया कि वे भी किसी काम में बेटों से कम नहीं है। देश में अनेकों ऐसे उदाहरण हैं जहां लड़कियों ने वो काम कर दिखाया है जो सिर्फ लड़कों का ही माना जाता था, ऐसा ही एक उदाहरण शनिवार को श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ में देखने को मिला
दरअसल सूरतगढ़ के गांव अमरपुरा जाटान में एक शख्श की मौत के बाद उसकी पांच बेटियों ने अपने पिता को न केवल कल्याण भूमि तक कंधा दिया, बल्कि चिता को मुखाग्नि भी दी।
दरअसल सूरतगढ़ के नजदीक अमरपुरा जाटान गांव के 64 वर्षीय देवीलाल भादू को 3 दिन पहले ब्रेन हेमरेज हो जाने की वजह से हॉस्पिटल में भर्ती करवाना पड़ा था। बीती रात देवीलाल की इलाज के दौरान मौत हो गई..और उनके घर में इससे भी ज्यादा शोक वाली बात ये थी कि उन्हे कोई कंधा देने वाला नहीं था। वर्षों से अमरपुरा गांव में खेती कर रहे देवीलाल के 5 पुत्रियां (विमला, उर्मिला, निर्मला, सुनीता और सविता) है। लेकिन एक बार फिर बेटियों ने ये कर दिखाया कि वो पराई नहीं होती और जरूरत आने पर वो ऐसा भी काम कर सकती है जिसके लिए कोई सोच भी नहीं सकता और ऐसे में चिता को अग्नि देने के लिए बेटियों ने आगे बढ़ अपने पिता को स्वयं मुखाग्नि देने की घोषणा की और कल्याण भूमि तक कंधा देते हुए वे सभी रस्म अदा की जो एक हिंदू रीति-रिवाज से बेटा अपने स्वर्गीय पिता के लिए करता है।
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