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जानिए ! आखिर क्यों होता है छठ पूजा का सबसे कठिन व्रत ?

इंटरनेट डेस्क। शास्त्रों में यह बताया गया है कि छठ पूजा करना सबसे कठिन व्रत है इस व्रत को करना आसान काम नहीं है। इसके कई कारण जिस वजह से इसका व्रत करना बहुत ही कठिन होता है। आज हम आपको इस खबर में उन सभी कारणों के बारे में बताएंगे जो इस व्रत को कठिन बना देते है।

यह माना जाता है कि छठ पूजा करना किसी कठिन तपस्या से कम नहीं है। इस व्रत करनाबहुत ही कठिन होता है। इस व्रत की यह मान्यता है कि करवाचौथ पर सुहागिनें करीब 16 घंटे बिना पानी पिए रहती है लेकिन इस व्रत में महिलाएं लगातार 36 घंटे बिना पानी पिए रहती है और व्रत की विधियां भी उनको खुद को ही करनी होती है।

छठ का व्रत चार दिन तक किया जाता है और इसमें सिर्फ भोजन ही नहीं, बल्कि आप सुख-आराम के किसी भी साधन का इस्तेमाल नहीं कर सकते है। आपको बता दें कि इन दिनों के दौरान व्रत वाली महिलाएं कमरे में फर्श पर एक कंबल या चादर सहारे ही रहती है। यही नहीं इसमें जिस जगह पर व्रति चार दिन तक रहती है वहां प्याज-लहसुन का इस्तेमाल भी नहीं जाता।

आपको बता दें कि इस उत्सव में शामिल होने वाले लोग नए कपड़े पहनते है। लेकिन व्रत करने वाले ऐसे कपड़े पहनते है, जिनमें किसी प्रकार की सिलाई नहीं की होती है। आपको यह जानकर हैरानी होंगी कि 36 घंटे के निर्जला व्रत में मिट्टी के चूल्हे में आम की लकड़ी को जला कर खाना पकाया जाता है। और यही नहीं आम की लकड़ी भी परिवार के ही किसी सदस्य द्वारा लायी जाती है।

इस व्रत के दौरान डूबते सूरज को देखना भी बहुत बड़ा अपशगुन माना जाता है लेकिन छठ पर्व में डूबते हुए सूरज की भी पूजा की जाती है। यह व्रत वैसे तो महिलाओं द्वारा किया जाता है लेकिन पुरुष भी यह व्रत रख सकते है। इस व्रत में जो चौथा दिन होता है वह महिलाओं के लिए बहुत ही कठिन होता है क्योंकि 36 घंटों का निर्जला व्रत और फिर जमा देने वाले ठंडे पानी में सूर्य भगवान के निकलने का इंतजार। शायद यही वजह होती है इस छठ पूजा को दुनिया का सबसे कठिन व्रत मानने की।

इस व्रत के दौरान महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती पहनकर यह व्रत रखते है। यह व्रत उस महिला के द्वारा तब तक किया जाता है जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित महिला को इस व्रत के लिए तैयार न कर लिया जाए। ध्यान दें घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर यह पर्व नहीं मनाया जाता है।

-पहला दिन, नहाय खाय
महापर्व छठ का पहला दिन नहाय खाय से शुरू होता है। आपको बता दें व्रत के पहले दिन महिलाएं घाट पर जाकर स्नान करती है। और फिर विभिन्न वस्तुओं के द्वारा नहाय खाय की विधि को पूरा किया जाता है। पवित्र नदी के जल से घर शुद्ध किया जाता है और फिर व्रत से पहले लोग परिवार सहित शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण करते है।

– दूसरा दिन, खरना
छठ पूजा का दूसरा दिन व्रत करने वालों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन होता है खरना। पूरे दिन का उपवास कर व्रती इस दिन जल की एक बूंद भी ग्रहण नही करता। और यही नहीं शाम के वक्त गुड़ की खीर बनाकर या गन्ने का जूस प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।

– तीसरा दिन, सूर्य को शाम का अर्घ्य
व्रत के तीसरे दिन सूर्य को शाम को अर्घ्य दिया जाता है। आपको बता दें कि यह सूर्य षष्ठी का दिन होता है और छठ पूजा का तीसरा। इस दिन जागरण किया जाता है और सभी एकत्रित होकर छठ माता के गीत गाते है और व्रत से संबंधित कथा सुनायी जाती है।

-चौथा दिन, उगते सूर्य को अर्घ्य
इस व्रत का चौथा दिन भी लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। यह बताया गया है कि यह दिन इन चार दिनों की तपस्या के बाद वरदान मांगने का दिन होता है। इस दिन सूर्य के उगने से पहले ही नदी घाटों पर पहुंचना होता है।और व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देते है और छठी माता से संतान व परिवार की रक्षा के लिए वरदान मांगते है। पूजन के बाद प्रसाद बांटा जाता है और व्रती भी इसी प्रसाद से अपना व्रत खोलते है।

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