अक्षय नवमी को करें विधि-विधान से पूजा, होंगी संतान प्राप्ति
इंटरनेट डेस्क। हिन्दू धर्म में कार्तिक के महीने को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है और इस महीनें में ही सबसे अधिक पूजा-पाठ की जाती है। आपको बता दें कि 29-10-2017 को अक्षय नवमी है और यह दिन संतान व सौभाग्य प्राप्ति के लिए बहुत अच्छा है। जिन लोगों को संतान का सुख प्राप्त नहीं है वे इस के दिन पूजा जरूर करें। आज हम आपको शुभ मुहुर्त और पूजन की विधि के बारे में बताने जा रहे है। आपको बता दें कि कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की नवमी अक्षय नवमी के रूप में मनाई जाती है। और इस बार यह नवमी 29 अक्टूबर को है यही मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहुर्त के अनुसार आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। इस दिन ऐसा करने से लोगों संतान का सुख प्राप्त और समृद्धि प्राप्त होती है। आइए जानते है पूजन के शुभ मुहुर्त और विधि के बारे में …..
-पूजन का शुभ मुहुर्त :-
इस दिन यह मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है इसलिए इस दिन को आंवला नवमी के नाम से भी जानते है। जिन लोगों को संतान का सुख प्राप्त नहीं होता है वे इस दिन संतान प्राप्ति के लिए आंवले के पेड़ की विधिविधान से पूजा व व्रत करें। ऐसा करने से आपकी मनोंकामना जरूर पूरी होंगी। यही नहीं इसके अलावा आंवले के पेड़ के नीचे पूजन के बाद प्रसाद ग्रहण करना और आंवला खाना भी बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन यह मान्यता है कि आंवले के पेड़ की विधिविधान से पूजा करने से आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी। और आपका घर सुख-समृद्धि से भर जाएगा से हमारा शरीर भी स्वस्थ्य रहता है। आपको यह जानकर खुशी होंगी कि 29 अक्टूबर रविवार को यह नवमी मनाई जाएगी। ध्यान रहें इस दिन विधि -विधान से पूजा पाठ करें और पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 34 मिनट से दोपहर 12 बजकर 04 मिनट तक ही रहेगा। इसी मुहूर्त में पूजा पथ करें।
-जानें पूजन करने की विधि :-
इस दिन पूजा करने के लिए सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर इसके बाद आंवले के पेड़ के नीचे जाकर उसकी विधि -विधान से पूजा करें। आंवले के पेड़ की पूजा में दूध, सिंदूर, चंदन, फल, मिष्ठान, वस्त्र आदि का जरूर उपयोग करें। और यही है पूजा के दौरान नए वस्त्र व श्रृंगार का सामान भी आंवले के वृक्ष को अर्पित करें। इसके बाद पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाकर विधिविधान से वृक्ष की आरती करें। जब आपकी पूजा संपन्न हो जाएं तो उसके बाद सफेद कच्चे धागे से आंवले के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करें। ऐसा करने से ही पूजा संपन्न मानी जाती है। जब आपकी पूजा हो जाएं तो उसके बाद श्रृंगार का सारा सामान व वस्त्र किसी गरीब व्यक्ति को दान करें। इसके बाद जिस प्रसाद को आपने पूजा में अर्पित किया था उसको ग्रहण करें। यही नहीं इस दिन यह भी मान्यता है कि अपनी हर मनोकामना पूरी करने के लिए इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे ही भोजन करें। ऐसा करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
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