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मंगल के विशाल सागर ने बताया- धरती पर कब शुरू हुई थी ज़िंदगी?

​पढ़ें शोध में क्या आया सामने

लाल ग्रह यानी कि मंगल पर भले ही आज कुछ न हो और इसे बेकार समझा जाता हो, लेकिन यह हमेशा से ऐसा नहीं था। वैज्ञानिकों ने पाया है कि करीब 3 अरब 70 करोड़ साल पहले इसके दक्षिणी हिस्से में विशाल सागर हुआ करता था जिससे कि गर्म धाराएं भी निकली थीं। इनमें खनिज प्रचुर मात्रा में मौजूद थे।
सागर के अंदर इसी तरह की चीजें यहां धरती पर भी हुई थीं, जो इस बात की ओर इशारा करती हैं कि इस ग्रह पर जीवन की शुरुआत कैसे हुई होगी। इस खोज को करने वाले शोधकर्ताओं की अन्तर्राष्ट्रीय टीम के अनुसार चट्टान, पानी, पोषक तत्व एवं गर्मी के मिश्रण से मंगल पर जीवन हुआ होगा। साथ ही इससे यह भी पता चलता है कि धरती पर भी ऐसे ही जीवन की उत्पत्ति हुई होगी।
हस्तन में नासा जॉनसन स्पेस सेंटर के पॉल नील्स ने कहा, भले ही मंगल पर कभी जीवन न रहा हो, लेकिन ये बताते हैं कि वहां मिले वातावरण से धरती पर जीवन कैसे शुरू हुआ होगा। पानी के साथ मिलकर ज्वालामुखी प्रक्रियाओं ने बिल्कुल वैसे ही परिस्थितियां पैदा कर दी थीं, जैसा कि उस समय धरती जीवन की शुरुआत के दौरान रही होंगी।
 
खनिजों का जमाव
नासा मार्स रिजोनेंस ऑर्बिटर और इसके कॉम्पैक्ट रिजोनेंस स्पेक्ट्रोमीटर फॉर मार्स ने यहां के एक बेसिन की फोटो भेजी है, जिसमें इसकी सतह पर खनिजों के जमाव को देखा गया है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इन खनिजों की जांच करने पर मालूम चला है कि कभी यहां गर्म धाराएं, सागर और ज्वालामुखी गतिविधियों से गर्म चट्टानें रही होंगी।
 
विशाल सागर
उन्होंने कहा कि यह सागर बहुत विशाल दो लाख 10 हजार क्यूबिक किलोमीटर में फैला होगा। यह प्राचीन मंगल पर जितने भी सागर और झील आदि थे, उन सबसे भी बड़ा रहा होगा। उत्तरी अमेरिका के ग्रेट लेक में जितना पानी है, यहां उससे भी नौ गुना अधिक पानी रहा होगा। अरबों वर्षों के दौरान सौर पवनों की वजह से ये सूख गए होंगे। धरती पर चुम्बकीय क्षेत्र की वजह से ऐसा नहीं हुआ।
 
यहां रहा होगा जीवन
नील्स ने कहा कि सभी चीजों की उपलब्धता के बाद भी यह जरूरी नहीं की ग्रह पर जीवन रहे ही। हर ग्रह धरती के जैसा तो हो नहीं सकता। लेकिन जितनी भी चीजें मंगल पर पायी गयीं, वहीं चीजें उस दौरान धरती पर भी थीं। इसलिए यह कहा जाता है कि उस दौरान धरती पर जीवन शुरू हो रहा होगा।
 
नहीं रखे जा सके संरक्षित
धरती को लेकर समस्या यह है कि यहां चीजें सुरक्षित नहीं रह सकीं, जिनके आधार पर उस काल के दौरान धरती पर जीवन के बारे में कुछ ठीक से कहा जा सके। धरती पर भी पानी के अंदर ऐसी गतिविधियां हुई होंगी, पर उनके नमूने सुरक्षित नहीं रखे जा सके। जिस तरह मंगल की हमें जानकारी मिल रही है, वैसे ही धरती की भी मिल जाती तो यह बताना संभव हो जाता कि यहां जिंदगी की शुरुआत आखिर कब हुई। अध्ययन के नतीजे नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुए हैं।



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