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असली या नकली फोटो-विडियो को इस तकनीक से पहचानें… - Khabar NonStop

Multimedia Security

रायपुर। रायपुर में स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) में मल्टीमीडिया सिक्योरिटी पर कार्यशाला आयोजित की गयी। इस कार्यशाला में दूसरे दिन छात्रों को व्याख्यान देते हुए डॉ. टीके दास ने इमेज फोरेंसिक तकनीक पर विस्तृत चर्चा की। इसके अंतर्गत उन्होनें छात्रों को बताया कि अगर किसी विडियो और फोटो में होती है तो इसका पता इमेज फोरेंसिक तकनीक से लगाया जा सकता है।

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ऐसे होती है असली या नकली विडियो की पहचान

कार्यशाला में छात्रों को मल्टीमीडिया सिक्योरिटी की तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया गया। डॉ दास ने छात्रों को बताया कि एडिटिंग करते समय लोग फोटो या विडियो की डेट, टाइम और अन्य जानकारियों को आसानी से बदल देते हैं। लेकिन इनमें कुछ बारीक पॉइंट्स होते हैं, जिन्हें आसानी से नहीं बदला जा सकता। इमेज फोरेंसिक तकनीक से अगर किसी विदों में छेड़खानी हुई है उसका पता लगा लिया जाता है। अगर विडियो को किसी एक्सपर्ट ने एडिट किया है तो उस विडियो के फ्लो से पता लगाया जा सकता है।

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कॉपीराइट, ऑनरशिप, पाइरेसी पर हुई चर्चा

कार्यशाला को एनआईटी के कार्यक्रम समन्वयक डॉ टी मीनपाल कोआर्डिनेट कर रहे थे। उन्होनें छात्रों को बताया कि फोटो को कैसे बनाया जाता है। फोटो बनाने की हर बारीकियों पर उन्होनें छात्रों के साथ चर्चा की। उन्होनें छात्रों को बताया कि, “सिक्योर डिजिटल मल्टीमीडिया कम्यूनिकेशन सिस्टम डिजाइन करने के लिए डिजिटल वाटरमेकिंग जैसे टेक्नीक का उपयोग किया जाता है। इसके माध्यम से कॉपीराइट, ऑनरशिप, पाइरेसी जैसी समस्याओं को आसानी से सॉल्व किया जा सकता है।”

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