महिला सुरक्षा पर पुलिस भी उदासीन, महिलाओं में बना पुलिसिया खौफ - Khabar NonStop
भोपाल। मध्य प्रदेश के भोपाल में हुई गैंगरेप की घटना ने पूरे देश को एक बार फिर से महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सोचने को मजबूर कर दिया। महिलाओं को पुलिस पर भरोसा न होना, यह भारत के लिए काफी दुर्भाग्यपूर्ण बात है। आज समाज में हर दिन बलात्कार की घटनाएं हो रही है। ऐसे में दोषियों को कडी सजा होने के लिए प्रयास करने की अपेक्षा पुलिस साधा एफआइआर प्रविष्ट करने में भी टालमटोल करती है। यही घटना यदि उनके किसी परिजनों की महिलाओं के साथ होती तो क्या वे यही रवैया अपनाते? महिला हेल्पलाइन के आंकड़ों की मानें तो पिछले दो महीने में 92 युवतियों ने छेड़छाड़ की शिकायत की है, लेकिन इसमें से केवल सात मामलों में ही एफआईआर हो सकी। पुलिसिया खौफ के असर से महिलाएं शिकायत दर्ज कराने से भी डरती हैं।
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महिलाएं नहीं जुटा पातीं हिम्मत
‘वी केयर फॉर यू’ की प्रभारी आकांक्षा शर्मा ने एक समाचार पात्र से बातचीत में पिछले दिनों कहा था कि गंभीर अपराध के बावजूद भी महिलाएं पुलिस में उसकी शिकायत दर्ज कराने से कतरातीं हैं। शिकायत करने की हिम्मत जुटा पाना उनके बस की बात नहीं होती। पुलिस के इस उदासीन रवैये को देखते हुए सरकारने ऐसे सुस्त पुलिसों को निलंबित कर कर्तव्यदक्ष पुलिस की ही भर्ती करनी चाहिए।
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3 महीने में 15 केस, 10 में सजा
पिछले तीन महीनों में ज्यादती और लैगिंग अपराधों से जुड़े 15 से ज्यादा मामलों में कोर्ट के फैसले आए। इनमें 10 में सजा सुनाई गई। तीन में महिला के बयान बदलने से आरोपी बरी हो गए। दो मामलों के आरोपी सबूतों के अभाव में बरी कर दिए गए। प्राचीन काल में भारत में एक आदर्श राज्यव्यवस्था थी। सभी को धर्मशिक्षा दी जाती थी। इसलिए महिलाओं की ओर कोर्इ पुरुष बुरी नजर से देखने का दु:साहस नहीं करता था। महिलाएं भी स्वयं को सुरक्षित महसूस करती थी। किंतु आज के इस कलियुग में धर्मशिक्षा न मिलने के कारण एवं पाश्चिमात्यों का अनुकरण करने से बलात्कार, छेडछाड जैसी घटनाएं बढ रही है।
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