फ्लर्ट करना जब बन जाता है यौन शोषण - Khabar NonStop
हम सभी एक बात तो मानते हैं कि कभी-कभी मजाक ज्यादा बढ़ जाने से रिश्तों में ज्यादा मनमुटाव आ जाता है। जिस कारण प्यार तो दूर आप दोस्ती का रिश्ता भी खो देते हैं। किसी के कंधे पर हाथ रखना, किसी के रंग-रूप की तारीफ करना या किसी को डेट पर चलने के लिए पूछना। शायद इसे ही फ्लर्ट करना कहा जाता है। आज के वक्त में फ्लर्टिंग को कोई बुरा भी नहीं मानता। ये चीजें सही इंसान के साथ और सही वक्त पर करना बेहद जरूरी है।
-ऐसा फ्रेंडली व्यवहार या इसे फ्लर्टिंग नाम भी दे सकते हैं ये हम किसी ऐसे इंसान के साथ करते हैं यह फ्लर्टिंग की जगह शर्मिंदगी की वजह बन सकता है।
-इसमें महिलाओं के साथ यौन शोषण के कई मामले सामने आए हैं, जिसमें जाने माने हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वी वाइनस्टीन का मामला सबसे ताजा है।
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कई बार लगा शोषण का आरोप
हॉलीवुड की कई प्रसिद्ध अभिनेत्रियों ने उन पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। ऐसे में यह जानना बेहद अहम हो जाता है कि फ्लर्ट करना कब यौन शोषण में बदल जाता है और इन दोनों में क्या अंतर है, पर्सनल रिलेशन एक्सपर्ट जेम्स प्रीस का मानना है कि अगर हम किसी व्यक्ति के प्रति आकर्षित हैं तो हम फ्लर्ट कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करने के लिए हमें सामने वाले व्यक्ति को भी समझना होगा।
-प्रीस के पास 23 से 72 साल की उम्र वाले अलग-अलग लोग आते हैं। वो उन्हें यही सलाह देते हैं कि फ्लर्ट हमेशा ही हल्के-फुल्के और मजाकिया अंदाज में करना चाहिए, उसमें यौन भावनाएं शामिल नहीं होनी चाहिए।
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समाजशास्त्री मारिया जोस गुएरो के अनुसार
अगर किसी को अपने साथ हो रही फ्लर्टिंग से परेशानी है तो उसे यह बात खुलकर बता देनी चाहिए, वहीं दूसरे व्यक्ति को भी इसके बाद फ्लर्ट करना बंद कर देना चाहिए।
-मारिया का कहना है कि ‘वैसे तो बातचीत कर भी किसी को मना किया जा सकता है, लेकिन हावभावों से ही इंकार को समझ लेना चाहिए, जैसे अगर कोई किस करने से मना कर दे”।
-इंग्लैंड के इंस्टिट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ सिविल सोसाइटी में महिलाओं पर अध्य्यन कर रहीं समाजशास्त्री कैथरीन हकीम कहती हैं, ”जब कोई पुरुष या महिला यह बात नहीं समझता कि दूसरा व्यक्ति उनकी हरकतों से परेशान हो रहा है, तब यह उत्पीड़न का रूप लेने लगता है” हालांकि कुछ अध्य्यनों से यह बात भी निकलकर आई कि कुछ मामलों में महिलाएं साफतौर पर इनकार नहीं करतीं।
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मारिया जोस गुएरो का कहना
लातिनी अमरीका में तो यह माना जाता है कि अगर कोई महिला इनकार कर रही है तो उसका मतलब हां से है। मैक्सिको में वकील और अध्यापिका नॉरा पिकासो भी इस बात से सहमत हैं।
-महिलाओं को शुरू से ही यही समझाया जाता है कि जल्दी से किसी बात के लिए हां नहीं बोलना चाहिए, इनकार करके पुरुषों को तड़पाना चाहिए।
-इसी तरह दूसरे देशों में गाल पर किस करना आम बात है, इसलिए अलग परिवेश में यह स्थिति बदल जाती है। वहीं विशेषज्ञों का मानना यही है कि संस्कृतियां चाहे कितनी भी जुदा हों, महिलाओं को अपनी परेशानियां खुलकर बतानी चाहिए और जब कभी उन्हें असहज हालात लगे तो उसके खिलाफ आवाज भी उठानी चाहिए।
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